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महेंद्र सिंह धोनी

Uploaded Date: 16 August 2020

 

महेंद्र सिंह धोनी 

महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसा नाम जो देश और दुनिया में हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में बस्ता है | जीवन में कामयाबी की बुलंदियों पर पहुचने वाला एक ऐसा सितारा जिसके जैसा न पहले कोई हुआ न ही होगा |

धोनी के इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर होने की घोषणा के साथ ही एक बेहद ही शानदार युग का अंत हो गया | धोनी का जन्म झारखण्ड के राची में एक मध्यम वर्गीय परिवार मे हुआ | उनके पिता का नाम पान सिंह व माता का नाम देवकी है |

धोनी भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और सबसे सफल एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कप्तान रह चुके है | अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और चपल विकेटकीपिंग के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाने वाले धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को ICC विश्वकप 20-20 (2007), ICC विश्वकप (2011) और ICC चैंपियंस ट्रोफी (2013) में जीत दिलाई | ICC के तीनो प्रारूपो मे ऐसा करने वाले वो एक लोते कप्तान है |

धोनी को पद्म भूषण, पदमश्री और राजीव गाँधी खेल रतन पुरुस्कार से भी सम्मानित किया जा चूका है | अपने लम्बे बालो और शांत स्वभाव के कारण उन्हें माही और कैप्टेन कूल जैसे नामो से भी जाना जाता है |

पूरा नाम

महेंद्र सिंह धोनी

जन्म

7 जुलाई 1981 (आयु 39) राची ,झारखंड ,भारत

उपनाम

माही,एमएसडी ,एमएस ,कैप्टन कूल

   

बल्लेबाजी की शैली

दाएं हाथ से

गेंदबाजी की शैली

दाएं हाथ से मध्यम गति से

भूमिका

विकेटकीपर, बल्लेबाज

 

राष्ट्रीय पक्ष

  • भारत

टेस्ट में पदार्पण (कैप)

2 दिसम्बर 2004 बनाम श्रीलंका

अंतिम टेस्ट

26 दिसम्बर 2014 बनाम आस्ट्रेलिया

वनडे पदार्पण

23 दिसम्बर 2004 बनाम बांग्लादेश

अंतिम एक दिवसीय

17 जुलाई 2018 बनाम इंग्लैंड

एक दिवसीय शर्ट स॰

7

टी20ई पदार्पण (कैप)

1 दिसम्बर 2006 बनाम दक्षिण अफ्रीका  

अंतिम टी20ई

22 दिसम्बर 2017 बनाम श्री लंका  

 

कैरियर के आँकड़े

प्रतियोगिता

टेस्ट

वनडे

T20

टी20

मैच

90

341

98

302

रन बनाये

4,876

10,500

1,617

6205

औसत बल्लेबाजी

38.09

50.72

37.60

38.54

शतक/अर्धशतक

6/33

10/71

0/2

0/24

उच्च स्कोर

224

183*

56

84*

गेंद किया

96

36

12

विकेट

0

1

0

औसत गेंदबाजी

31.00

एक पारी में ५ विकेट

0

0

0

मैच में १० विकेट

0

0

श्रेष्ठ गेंदबाजी

1/14

कैच/स्टम्प

256/38

314/120

159/78

364/57

 

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Rafale Fighter Jets (डसॉल्ट एविएशन राफेल)

Uploaded Date: 29 July 2020

 

डसॉल्ट राफेल या राफेल एक फ्रेंच दोहरे इंजन वाला, कैनर्ड डेल्टा विंग, मल्टीरोल डेसॉल्ट एविएशन द्वारा डिजाइन और निर्मित लड़ाकू विमान है। हथियार की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ सुसज्जित, राफेल का उद्देश्य वायु वर्चस्व, हस्तक्षेप, हवाई पुनर्मिलन, जमीन समर्थन, गहराई से मार, विरोधी जहाज हड़ताल और परमाणु प्रतिरोध मिशन करने का है। राफेल को डेसॉल्ट द्वारा "ओमनीरोले" विमान के रूप में जाना जाता है।

1970 के दशक के अंत में, फ्रांसीसी वायुसेना और नौसेना अपने मौजूदा बेड़े को प्रतिस्थापित करने और समेकित करने की मांग कर रहे थे। विकास लागत को कम करने और संभावित बिक्री को बढ़ावा देने के लिए, फ्रांस ने यूके, जर्मनी, इटली और स्पेन के साथ एक चुस्त बहुउद्देश्यीय लड़ाकू, यूरोफाइटर टाइफून का उत्पादन करने के लिए एक व्यवस्था में प्रवेश किया। कार्यशालाओं और अलग-अलग आवश्यकताओं के बाद के असहमति ने फ्रांस के अपने विकास कार्यक्रम की खोज की। डैसॉल्ट ने एक तकनीकी प्रदर्शक बनाया जो पहली बार जुलाई 1986 में आठ साल के फ्लाइट-टेस्ट प्रोग्राम के हिस्से के रूप में उड़ान भर गया, जिससे परियोजना के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया। राफेल अपने युग के अन्य यूरोपीय सेनानियों से अलग है कि यह लगभग पूरी तरह से एक देश द्वारा बनाया गया है, जिसमें फ्रांस के प्रमुख रक्षा ठेकेदारों जैसे डेसॉल्ट, थाल्सैंड सफ्रान शामिल हैं।

एक जरूरी है, ताकि एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-सी संचालन सुरक्षित और कुशलता से संचालित किया जा सके। विषम और आतंकवाद विरोधी संघर्षों के दौरान, वायु सेना भी सैन्य प्रयास में सबसे आगे रहती है, इसकी लचीलेपन और फायरिंग शक्ति की मदद से यह सुनिश्चित होता है कि संबद्ध सेना प्रबल हो। 11 सितंबर की घटनाओं से पता चला है कि, मयूर में, आसानी से तैनात नियंत्रण और वायु रक्षा परिसंपत्तियों के साथ राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र को सुरक्षित करना आवश्यक है। आधुनिक युद्ध में वायु घटक का निर्णायक स्थान उन राष्ट्रों द्वारा तय की गई रक्षा रणनीतियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जो विश्व मंच पर एक अग्रणी भूमिका रखना चाहते हैं। 

राफेल फ्रांसीसी वायु सेना और फ्रेंच नौसेना में वाहक-आधारित संचालन दोनों के लिए बनाया जा रहा है। राफेल को कई देशों में निर्यात के लिए विपणन किया गया है, और भारतीय वायुसेना, मिस्र वायुसेना और कतर वायुसेना द्वारा खरीद के लिए चुना गया था। अफगानिस्तान, लीबिया, माली, इराक और सीरिया में राफेल का इस्तेमाल किया गया है।

राफेल, अपनी "ओमनीरोले" क्षमताओं के साथ, बढ़ती सरकारों द्वारा चुनी गई क्षमता दृष्टिकोण का सही उत्तर है। यह पूरी तरह से विमान की सबसे छोटी संख्या के साथ भूमिकाओं की सबसे विस्तृत श्रृंखला को पूरा करने की आवश्यकता का अनुपालन करता है। राफेल स्थायी "क्विक रिएक्शन अलर्ट" (क्यूआरए) / वायु-रक्षा / वायु संप्रभुता मिशन, बाहरी मिशनों के लिए शक्ति प्रक्षेपण और तैनाती, गहरी हड़ताल मिशन, जमीनी बलों के लिए हवाई समर्थन, टोही मिशन, पायलट प्रशिक्षण सॉर्ट और परमाणु निवारक कर्तव्यों में भाग लेता है । वायु सेना एकल सीट राफेल सी, वायु सेना दो सीट राफेल बी, और नौसेना एकल सीट राफेल एम में अधिकतम एयरफ्रेम और उपकरण समानता, और बहुत ही समान मिशन क्षमताओं की सुविधा है।नवीनतम संघर्षों से सीखा सबक जहां वायु शक्ति का उपयोग किया गया था, राजनीतिक निर्माताओं द्वारा हथियार प्रणालियों के बारे में चार अतिशयोक्तिपूर्ण उम्मीदों में संक्षेपित किया जा सकता है: बहुमुखी प्रतिभा, वह क्षमता, एक ही प्रणाली के साथ, विभिन्न अभियानों को करने के लिए, इंटरऑपरेबिलिटी, या सहयोगियों के साथ गठबंधन में लड़ने की क्षमता, सामान्य प्रक्रियाओं और मानकों के समझौतों का उपयोग करना, और अन्य प्रणालियों के साथ वास्तविक समय में सहयोग करना और संचार करना, लचीलापन, जिसे एक ही सॉर्टी के दौरान कई अलग-अलग मिशनों को संचालित करने की क्षमता द्वारा चित्रित किया जा सकता है ("ओमनीरोले" क्षमता)। इस क्षमता के साथ, राजनीतिक निर्णय लेने वाले की मांग पर, एक जबरदस्ती मिशन ("स्ट्राइक फोर्स") से एक निवारक मिशन (एक निराशाजनक कम-ऊंचाई, उच्च गति "बल का प्रदर्शन") पर तुरंत स्विच करना संभव है। या अंतिम सेकंड (प्रतिक्षेपकता) तक एक मिशन को रद्द करने के लिए भी, उत्तरजीविता, जो कि घने खतरे के माहौल में जीवित रहने की क्षमता है, जो कि चोरी और / या उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के लिए धन्यवाद है। चार्ल्स डी गॉल विमान वाहक। राफेल एम। चार्ल्स डी गॉल विमान वाहक। राफेल एम। "ओमनीरोले" राफेल इन सभी लाभों को जोड़ती है: यह पारंपरिक और विषम दोनों खतरों के खिलाफ प्रासंगिक है, यह बदलते भूराजनीतिक संदर्भ में सशस्त्र बलों की उभरती जरूरतों को संबोधित करता है, और यह तकनीकी नवाचार में सबसे आगे रहता है। इसकी बहुमुखी प्रतिभा, इसकी अनुकूलनशीलता और सभी हवाई मिशन आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता के लिए धन्यवाद, राफेल "पोस्टर चाइल्ड" परिवर्तनकारी सेनानी है जो वायु सेनाओं को "कम", "कम" के साथ "अधिक" करने की आवश्यकता का सामना करने का एक तरीका प्रदान करता है। कभी बदलते सामरिक और आर्थिक परिवेश में। मध्यम आकार का, फिर भी बेहद शक्तिशाली, शानदार फुर्तीला और बहुत असतत, डसॉल्ट एविएशन से नवीनतम प्रकार का लड़ाकू विमान न केवल सेंसर की सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक रेंज को एकीकृत करता है, यह एक तकनीकी सफलता के साथ उनकी दक्षता को भी गुणा करता है, "मल्टी सेंसर डेटा फ्यूजन ”। उड़ान में राफेल। उड़ान में राफेल। खोज करना

राफेल स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है. यानी यह दुश्मन के रडार को चकमा देने के ताकत रखता है. साथ ही इसे इस हिसाब से डिजाइन किया गया है कि यह हिमालय के उपर भी उड़ान भर सकता है. बता दें कि हिमालय के उपर उड़ान भरने की काबिलियत अच्छे-अच्छे लड़ाकू विमानों में नहीं होती है.

फ्रांस ने अबतक कुल 10 राफेल विमान बना लिए हैं भारत के लिए. लेकिन अभी सिर्फ 5 राफेल विमानों को कल भारतीय वायुसेना के हवाले किया गया है. अन्य 5 राफेल विमानों को फ्रांस में ही रखा गया है ताकि वायुसेना के पायलटों व क्रू को फ्रांस में ट्रेनिंग दी जा सके. वहीं पिछले साल 1 राफेल विमान भारत को सौंपा गया था ताकि भारतीय पायलट भारत में राफेल की ट्रेनिंग अच्छे तरीके से ले सके.

अगर हथियारों की बात करें तो राफेल में सबसे खतरनाक मिसालइल Meteo beyond Visual Range AIR to Air Missile है. यह मिसाइल हवा से हवा में मार करने की क्षमता से लैस है. साथ ही बीते दिनों भारतीय वायुसेना ने राफेल में हैमर मिसाइलों को भी लैस करने की बात कही थी. इन मिसाइलों की खासियत है कि नो स्केप जोन में अगर कोई भी लड़ाकू विमान हो तो राफेल उसे मार गिराएगा. यह अचूक है. बता दें कि कुल 36 राफेल विमान भारत फ्रांस से खरीद रहा है. इसमें अन्य एयरक्राफ्ट को दो सालों में भारत को सौंप दिया जाएगा.

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डा. एपीजे अब्दुल कलाम

Uploaded Date: 28 July 2020

 

भारत के 11वे राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम को जब भी कोई भी देशवासी याद करता है तो उनके लिए सम्मान का भाव मन में भर जाता है | एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया | उनका हेयर स्टाइल युवाओ में बोहोत ही लोकप्रिय था |

भारत के ‘मिसाइल मैन’ के नाम से लोकप्रिय डा. एपीजे अब्दुल 27 जुलाई 2015 को दुनिया को अलविदा कह दिया | वे बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे | उनके पिता जैनुलब्दीन एक मछुआरे थे | इनकी माता अशिअम्मा एक गृहणी थी |

अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम था | इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में एक तमिल मुस्लिम परिवार में हुआ था | इनके 3 बड़े भाई व एक बहन परिवार में थी |

बेहद ही गरीब परिवार से होने के कारण अब्दुल कलाम को अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार बाटने का काम किया | कलाम ने 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से अन्तिरिक्ष विज्ञान में स्नातक किया |

1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे, इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम ने विजन 2020 दिया. इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई. कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.

कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था.

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IBPS RRB SYLLABUS 2020

Uploaded Date: 26 July 2020

 

IBPS RRB EXAM PATTERN OFFICE SCALE-1, 2 AND 3

IBPS RRB 2020 Officer Scale-1 (PO) Exam is conducted in 3 different phases while the Officer Scale-2 and 3 (SO) will be conducted through 2 phases.

Exam rounds for IBPS RRB Officer Scale-1 (PO):

  • Preliminary Exam
  • Mains Exam
  • Interview Process

IBPS RRB PO OFFICE SCALE-1 PRELIMS EXAM PATTERN 2020

Reasoning

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Numerical Ability

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Total Questions Numerical Ability + Reasoning = 80

Duration : 45 minutes

IBPS RRB PO OFFICE SCALE-1 MAINS EXAM PATTERN 2020

Reasoning

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Numerical Ability

Total Questions : 40

Total Marks : 50

General Awareness Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 40

English Language / Hindi Language

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Computer Knowledge Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 20

Total Questions :  200

Total Marks :  200

Duration : 2 Hours

IBPS RRB PO OFFICE SCALE-2 (General Banking Officer) MAINS EXAM PATTERN 2020

Reasoning

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Numerical Ability

Total Questions : 40

Total Marks : 50

General Awareness Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 40

English Language / Hindi Language

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Computer Knowledge Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 20

Total Questions :  200

Total Marks :  200

Duration : 2 Hours

IBPS RRB PO OFFICE SCALE-2 (SPECIALIST CADRE) MAINS EXAM PATTERN 2020

Reasoning

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Numerical Ability

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Financial Awareness Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 40

English Language / Hindi Language

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Computer Knowledge Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 20

Total Questions :  200

Total Marks :  200

Duration : 2 Hours 30 minutes

IBPS RRB PO OFFICE SCALE-3 MAINS EXAM PATTERN 2020

Reasoning

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Quantitative Aptitude & Data Interpretation Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 50

Financial Awareness Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 40

English Language

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Hindi Language

Total Questions : 40

Total Marks : 40

Computer Knowledge Paper

Total Questions : 40

Total Marks : 20

Total Questions :  200

Total Marks :  200

Duration : 2 Hours

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India needs to manage public health, economy better

Uploaded Date: 18 July 2020

 

A million cases, and counting

Over a million Indians have now been infected by COVID-19. Over 25,000 of them had died. India is the third most affected country in the world by case-load. And covid-19 is only spreading, hitting a record number of cases almost on a daily basis. Its impact may be different vis-a-vis different groups, but it has affected the old and young, men and women, the rich and the poor. And, not with standing the end of the lockdown, it has continued to affect everyday life, economic activity, income levels, social interactions, education, travel and mobility. 

India's experiance offers key lessons in how to manage the pandemic. The first lesson is that in the absense of a vaccine, there is no alternative toaggressive testing India rate is 9,323 tests per million people, much lower than other affected countries. there is a simple, obvious logic here, recognised by the government too. testing is only way to identify thosr who may have covid-19, isolate and treat them, and ensure that they don't become carries. but by instituting restrictive testing protocols and not using the available testing capacity, India has been slow to this. It should be clear after a million cases that not testing will not make the problem disappear. The second lesson is recognising that India is at a community transmission stage. this means that old protocols of limited contact tracing will not be enough in finding the infected ; it also means that , through chains and processes that cannot necessarily be traced , the infection has spread far and wide , possibly in rural areas. This , then , requires a far greater investment in district health infrastruture and personnel , medical equipment , especially in states with a weak public health care system.

The third lesson is that as the virus continues to make its way through other parts and other demographic segments, better economic management is essential. The lockdown devastated an already fragile economy, and caused suffering. There may be some bright spots, but the goverment's economic package did not go far enough in providing the stimulus needed to rev up the grouth engine, and its welfare schemes may not be adequate in addressing the humanitarian distress. As India heads towards both more cases and its most severe economic contraction in history, it is essential to get the lives and livelihoods balance right.

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MODI 2.0 : एक विश्लेषण

Uploaded Date: 30 May 2020

 

MODI 2.0 : एक विश्लेषण

आज जहां पूरा विश्व कोरोना महामारी के कारण संकट मैं है भारत के सामने भी बोहोत सी चुनोतिया है | भारत मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और जैसा की आप जानते है हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एक बड़े लोकप्रिय नेता है |

आज मोदी सरकार के दुसरे सत्र यानि modi 2.0 के पुरे 1 साल पुरे हो गए है आज यानि 30 मई नरेन्द्र मोदी जी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की सपथ ली |

मंत्रिमंडल मे कई बदलाव किये गए इन सब मे सबसे प्रमुख बदलाव था | पार्टी के रास्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को देश का गृह मंत्री बनाना |

साल 2014 मे पार्टी ने जब जीत हासिल की थी उस समय गृह मंत्री का पद राजनाथसिंह ने ग्रहण किया था | साल 2019 मे मिली प्रचंड जीत के बाद नए कार्यकाल मे उन्हें रक्षा मंत्रालय प्रदान किया गया |

इस एक साल मे सरकार द्वारा लिए गए कुछ महत्वपूर्ण फैसले  

1. आर्टिकल 370 :

मोदी सरकार के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है जम्मू कश्मीर से  आर्टिकल 35 A और और 370 को खत्म करना | इसके अलावा जम्मू – कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बाटने का प्रस्ताव रखा | जम्मू कश्मीर एक केंद्रशसित प्रदेश होगा जहा विधानसभा होगी और लद्दाख एक केंद्रशसित प्रदेश होगा जहा विधानसभा नहीं होगी |

70 साल से चली अ रही एक महत्वपूर्ण कुरीति जिसने जम्मू कश्मीर को भारत से अलग रखा उसे मोदी सरकार ने ख़तम किया | 

ARTICLE 35 - A

35ए को 1954 में इसे राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था। आर्टिकल 35ए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के 'स्थायी निवासी' की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को कुछ खास अधिकार दिए गए हैं। अस्थायी निवासी को उन अधिकारों से वंचित किया गया है। अस्थायी नागरिक जम्मू-कश्मीर में न स्थायी रूप से बस सकते हैं और न ही वहां संपत्ति खरीद सकते हैं। अस्थायी नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी और छात्रवृत्ति भी नहीं मिल सकती है। वे किसी तरह की सरकारी मदद के हकदार भी नहीं हो सकते। 

ARTICLE - 370

15 अगस्त 1947 तक गृहमंत्री लोह पुरुष बल्लभ भाई पटेल ने 449 भारतीय रियासतों को भारत में विलय कर लिया | 3 रियासतों जूनागढ़, हेदराबाद और जम्मू कश्मीर का विलय बाद में हुआ | जुनागढ़ को जनमत संग्रह के द्वारा, हेदराबाद को पुलिस करवाई (Operation पोलो) के द्वारा विलय किया गया | बाद में जम्मू-कश्मीर पर पकिस्तान ने आक्रमण कर दिया वहा के राजा हरि सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु से मदद मांगी | भारत सरकार ने रजा हरि सिंह की मदद की और पाकिस्तान को खदेड़ दिया | रजा हरि सिंह और प्रधानमंत्री के मध्य एक समझोता हुआ जिसमे जम्मू कश्मीर को भारत का अंग मान लिया गया | इस तरह 600 रियासतों में से 552 रियास्हतो का भारत में विलय हो गया | जम्मू कश्मीर को भारत में विलय के बाद शेख अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाली। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक संबंध को लेकर बातचीत की। इस बातचीत के नतीजे में बाद में संविधान के अंदर आर्टिकल 370 को जोड़ा गया। आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। आर्टिकल 370 के मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए। 

2. तीन तलक : तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओ के लिए सशक्तिकरण या एक राजनीतिक कदम

मुस्लिम समाज में व्याप्त कुप्रथा तीन तलाक को ख़तम करने वाला मुस्लिम विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 राज्यसभा में पास हो गया |

पहले इस विधेयक के सफ़र की कुछ मुख्य बातो पर चर्चा करते है |

1. अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को असवेधानिक और कुरान के मूल सिधान्तो के खिलाफ बताया |

2. दिसम्बर 2017 में लोकसभा ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार बिल पास किया लेकिन राज्यसभा में बिल अटक गया |

3. 19 सितम्बर 2018 में मोदी सरकार तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए कानून लायी |

4. 12 जनवरी 2019 को दूसरी बार और 21 फ़रवरी को तीसरी बार अध्यादेश जारी किया गया |

तीन तलाक कानून पास होने के बाद के प्रभाव  

1. कानून को मुस्लिम महिला (महिला अधिकार संरक्षण कानून) बिल 2019 का नाम दिया गया है |

2. मौखिक, लिखित या किसी भी प्रकार से एक बार में पत्नी को तलाक देना जुर्म होगा |

3. पत्नी के मायके या ससुराल के करीबी रिश्तेदार ही इस बारे में केश दर्ज कर सकते है |

4. यह संगीन अपराध की श्रेणी में है इसलिए पुलिस बिना वारेंट के गिरफ्तार कर सकती है |

5. पति को 3 साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकते है, जमानत भी मजिस्ट्रेट कोर्ट से होगी|

6. लेकिन मजिस्ट्रेट बिना पीड़ित महिला का पक्ष्य सुने जमानत नहीं नदे सकते |

7. पीड़ित महिला के अनुरोध पर ही मजिस्ट्रेट समझोता करा सकते है |

सबसे पहले ट्रिपल तलाक के खिलाफ सहारनपुर के मोहला अली की बेटी अतिया साबरी ने प्रधान मंत्री मोदी से गुहार लगायी थी | उन्होंने अपने भाई रिजवान की मदद से तीन तलाक से लड़ने के लिए सुप्रीमकोर्ट से गुहार लगाई | राज्यसभा में बिल के पास होने पर उन्हें बेहद ही खुशी हुई | एसी बोहत सी मुस्लिम महिलाये इस कानून की मांग कर रही थी | अब वह आने वाली पीढ़ी को यह बता सकती हैं कि कितनी मेहनत व शिद्दत के बाद यह दिन सामने आया है। आज के बाद मुस्लिम महिलाओं के लिए नया सवेरा आएगा। उन्होंने मुस्लिम समाज की तीन तलाक पीडि़ताओं को संदेश दिया कि वे कभी डरकर न जिएं बल्कि उसका सामना करें।

लेकिन समाज का एक वर्ग जहा इसे सही कह रहा है वही एक वर्ग ऐसा भी है जो इसका विरोद कर रहा है |

मोलाना खालिद रसीद के अनुसार तीन तलाक बिल राजनीतिक है | इससे फायदा कम नुकशान ज्यादा है |

पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाब नबी आजाद के अनुसार सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओ को सुरक्षा देने के बजाये मुस्लिम परिवारों को बर्बाद करने की है | इसे अपराधिक क्यों बनाया गया ?

अब आने वाले समय में इस ऐतिहासिक फैसले के क्या परिणाम होंगे यह देखना होगा | समाज में यह क्या नया बदलाव लायेगा यह भी देखना होगा |

3. राम मंदिर विवाद का निर्णय :

मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल मे राम मंदिर जन्मभूमि अयोध्या पर लटका विवाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ ही समाप्त हो गया कई वर्षो से चला अ रहा ये मुद्दा हिन्दू मुस्लिम दंगो की वजह भी बना |

70 वर्षो तक ये मुद्दा युही लटका रहा लेकिन मोदी सरकार के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट मे तेज गति से सुनवाई हुई और ये मुद्दा अंत मे समाप्त हो गया 

4. नागरिक संशोधन बिल

इसके बाद बीजेपी ने एक बार फिर एक विवादित मुद्दे को छेड़ा. यह था नागरिक संशोधन बिल. इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए ऐसे गैर मुस्लिम जिनके साथ धर्म के नाम पर अत्याचार किया गया हो, उनको नागरिकता देने का प्रावधान है. इसके साथ ही एनआरसी मुद्दा का भी उठा. जिसमें अवैध रूप रहे बांग्लादेशियों को पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने का प्रावधान था. हालांकि एनआरसी का विरोध देख सरकार को इसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डालना पड़ा |

इस समय देश मे covid महामारी के कारण हेल्थ इमरजेंसी है | lockdown के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह पटरी से उतर गयी है लोगो की नौकरी जा रही है | मजदूर पलायन कर रहा है देश बोहत ही बुरे दौर से गुजर रहा है |

अब आने वाले समय मैं चुनौतिया बोहोत ज्यादा है ऐसे मैं सरकार क्या कदम उठाएगी ये देखना होगा |

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Online Classes And Its Effect

Uploaded Date: 27 May 2020

 

आज जहां पूरी दुनिया कोरोना महामारी के कारण बंद है | इस वायरस के दर के कारण हर कोई अपने घरो मे बंद है | बाजार, मॉल, स्कूल, कॉलेज यहाँ तक की सरकारी दफ्तर भी बंद है ऐसे मे आज एक नए तरह की विश्व व्यवस्था का जन्म हो रहा है|

वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जहा सोशल डिस्टेंस के पालन की सलाह दी जा रही है वही अगर जरुरी न हो तो घर से ही काम करने की सलाह दी जा रही है |

जैसे की हमें यह पता है की यह वायरस बच्चो और बुजुर्गो के लिए बोहोत ही घातक है | लगतार सरकारे भी लोगो से इन आयु वर्गों के लोगो का विशेष ख्याल रखने की अपील कर रही है |

बच्चो को घर मैं ही रखने के लिए सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया | लेकिन जैसा हमें यह ज्ञात है की कोरोना का खतरा कितने दिनों तक रहेगा और मानव जाति की लड़ाई इस वायरस से कितनी लम्बी चलने वाकी है यह किसी को नहीं पता |

इन सब के बीच बच्चो की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और उनका सत्र भी लेट हो रहा है |

इस समस्या के समाधान के लिए बोहोत से स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास की सुविधा शुरू कर दी है | लेकिन ऑनलाइन क्लास की शुरुआत होते ही बोहत से मुद्दों पर बहस शुरू हो गए है |

1. इन्टरनेट सुविधा का अभाव 

ऑनलाइन क्लास के लिए जो सबसे महत्वपर्ण है वो है इन्टरनेट कनेक्शन, एक अनुमान के मुताबिक भारत में शहरी इलाको मे लगभग 60 से 70% लोगो के पास ही एक्टिव इन्टरनेट कनेक्शन है |

लेकिन ग्रामीण इलाको में यह संख्या केवल 35% से 40% ही है | ऐसे में ऑनलाइन पढाई में अगर कोई पीछे छूट रहा है तो वो है उस गरीब परिवार का बच्चा जिसके पास इन्टरनेट की सुविधा नहीं है |

बोहोत से ऐसे ग्रामीण इलाके है जहां लोगो के पास न ही स्मार्ट फ़ोन है और न ही कंप्यूटर फिर ऐसे में उन गरीब बच्चो तक शिक्षा को पहुचाना एक बड़ी चुनौती है |

सयुक्त राष्ट्र बाल कोष के मुताबिक लगभग 82.6 करोड़ छात्र ऐसे है जिनके पास कंप्यूटर की सुविधा नहीं है और लगभग 70.6 करोड़ छात्र ऐसे है जिनके पास इन्टरनेट की सुविधा नहीं है |

2. मानसिक अवसाद और यौन उत्पीड़न का खतरा  

ज्यादा समय तक इन्टरनेट पर समय बिताने के कारण कई सारी मानसिक और शारीरिक महामारियो का खतरा भी बढ़ता है | आज के युग जहा इन्टरनेट पर बोहोत से सोशल प्लेटफॉर्म ऐसे है जहा पर यौन उत्पीड़न का खतरा बोहोत अधित रहता है |

3. गुणवत्ता का अभाव 

बोहोत से एक्सपर्ट की माने तो ऑनलाइन एजुकेशन मे शिक्षक के अभाव मे बच्चो के सीखने और अनुशासन की कमी के कारण उनकी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ रहा है |

कुछ बच्चो का यह भी कहना है की समय की कमी और शिक्षक का सभी बच्चो पर ध्यान न दे पाने के कारण वह बोहोत से प्रशन भी नहीं पाते है |

बच्चो से प्रत्येक पाठ के बाद टेस्ट लेना, एसैन्मेंट बनवाना इन सब एक्टिविटीज मैं भी बोहोत सी समस्यों का सामना करना पड़ रहा है |

अगर हम सही माएनो मे देखे तो ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली मे सबसे ज्यादा प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर ही पड़ रहा है |

अगर हम अकादमिक कक्षाओ मतलब 1 से 12 तक कक्षाओ की बात करे तो यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सॉर्ट टर्म के लिए तो प्रभावशाली है लेकिन लम्बी अवधि तक इससे जुड़े रहने वाले छात्रों पर इसके खतरनाक प्रभाव देखने को मिल रहे है |

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1947 के बाद सबसे बड़ा पलायन

Uploaded Date: 15 May 2020

 

1947 देश विभाजन से लेकर 2020 आजतक भारत ने काफी परिपक्वता प्राप्त की लेकिन आज जब तालाबंदी के 50 दिन बीत गए है देश की स्तिथि देश विभाजन के समय से भी बदतर है |

ऐसा हम क्यों कह रहे है जब देश का विभाजन हुआ उस समय की बात करे तो भारत में एक नई व्यवस्था का जन्म हो रहा था | अंग्रेज भारत छोड़कर जा रहे थे | उनके जाने के साथ की सारी वयवस्था भी अस्त-व्यस्त हो चुकी थी | न तो जिलो में जिलाधिकारी थे न ही पुलिस |

भारत एक नई दिशा में चलना शुरू ही कर रहा था | लाखो लोग दंगो की भेट चढ़ गए थे इन सब के बीच भी लाखो लोगो को राहत शिविर में पनाह मिली | जगह - जगह भोजन वितरण की व्यवस्था की गए |

आज आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद जब सरकारे बड़े-बड़े दावे करती है तो आज के समय वो दावे जुमले मात्र ही लगते है |

कहते है भारत की आत्मा गाँव, गरीब किसान और मजदूरों में बस्ती है वो गरीब मजदूर जो अपने पसीने से देश का भाग्य लिखता है आज उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है |

अगर सरकरी आकड़ो की बात करे तो राज्य सरकारों के अपने-अपने तर्क है | उत्तर प्रदेश में अभी तक 15 लाख मजदूर सरकारी आकड़ो में प्रदेश वापस आये है और पैदल, साइकिल व अन्य साधनों से वापस आने वालो का तो कोई आकड़ा ही नहीं है |

सैकड़ो लोगो अपने घरो की हजारो किलोमीटर की दुरी पैदल ही जाने को मजबूर है न पैरो में चप्पल न पेट मे दाना | बिस्कुट और पानी पीकर ही लोग गुजारा कर रहे है | ऐसा लगता है अब बिस्कुट ही राष्ट्रीय भोजन बन गया है |

आज राज्यों की सीमायें इन मजदूरों के लिए बॉर्डर बन गयी है प्रदेश की सीमा पर पुलिस की लाठियां उनके बदन पर पड़ रही है | जिसके कारण लाखो लोगो को रेल की पटरी ही घर जाने का रास्ता बनी हुई है |

रेल पटरी पर चलने के कारण कई मजदूरों की जान भी चली गयी | महाराष्ट्र में हुए हादसे में 16 मजदूर मालगाड़ी से काटकर मर गये | महाराष्ट्र हो या गुजरात दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश आये दिन ये गरीब हादसों का सिकार हो रहे है |

जो मजदूर कर तक अमीरों की जागीर थे और सरकारों के चुनावी एजेंडा थे आज उनको न ही पेट भर भोजन प्राप्त है और न ही सरकारी मदत |

घर वापसी के लिए मजबूर ये गरीब अपने घर जाने के लिए किस तरह की यातनाये सह रहे है कई लोगो ने पाच-पाच हजार रूपए कर्ज लेकर ट्रको और ऑटो चालको को देने पड़े |

तालाबंदी होने के बाद लाखो लोगो की नौकरिया चली गए आज अगर हम सडको पर देखे तो ऐसा लगता है जैसे फल और सब्जी बेचने वालो की बाढ़ आ गयी है चारो तरफ अफरातफरी का माहोल है हर कोई अपने आने वाले कल को लेकर परेशान है |

माँ अपने बच्चे को लेकर सेकड़ो किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर है | पैदल चलते-चलते कई मजदूर भूख, प्यास और थकान से अपनी जान गया चुके है |

अब तो भगवान से बस यही प्राथना है जो सिसयासतदार चुनावों के समय बड़े-बड़े दावे करते है वो इन गरीबो की कुछ शुध ले |

 

 

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत आर्थिक पैकेज की प्रमुख बाते

Uploaded Date: 14 May 2020

 

आर्थिक पैकेज की प्रमुख बाते

  1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए कई उपायों की घोषणा की, जिनमें COVID-19 से प्रभावित एमएसएमई शामिल हैं
  2. आर्थिक पैकेज जिसे ‘आत्म निर्भर भारत अभियान’ कहा जाता है और यह अर्थव्यवस्था, आधारभूत ढांचा, सिस्टम, वाइब्रेंट डेमोग्राफी और मांग के पांच स्तंभों पर आधारित है
  3. MSMEs सहित व्यवसायों के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी
  4. एमएसएमई फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये का इक्विटी इन्फ्यूजन
  5. 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी निविदाओं के लिए कोई वैश्विक निविदा नहीं
  6. रएनबीएफसी / एचएफसी / एमएफआई के लिए 30,000 करोड़ की विशेष तरलता योजना
  7. एनबीएफसी / एमएफआई की देयताओं के लिए 45,000 करोड़ की आंशिक ऋण गारंटी योजना 2.0
  8. DISCOMs के लिए 90,000 करोड़ रुपये का तरलता निवेश
  9. जून, जुलाई और अगस्त 2020 के वेतन महीनों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि सहायता का विस्तार
  10. ईपीएफओ द्वारा अगले 3 महीनों के लिए कवर किए गए सभी प्रतिष्ठानों के लिए नियोक्ता और कर्मचारियों के लिए ईपीएफ अंशदान 3 महीने के लिए 12% तक घटाकर 10% किया जाएगा
  11. ईपीसी और रियायत समझौतों के संबंध में, अनुबंध दायित्वों को पूरा करने के लिए छह महीने तक के लिए कांट्रेक्टर को राहत
  12. रियल एस्टेट परियोजनाओं को राहत: सभी पंजीकृत परियोजनाओं के लिए पंजीकरण और पूर्णता तिथि को छह महीने तक बढ़ाया जाएगा
  13. वित्त वर्ष 20-21 की शेष अवधि के लिए ‘टैक्स डिडक्शन एट सोर्स’ (टीडीएस) और ‘टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स’ (टीसीएस) की दरों में 25% की कमी |
  14. 2019-20 के लिए आयकर रिटर्न भरने की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ाई गई |

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Indian States, Capital, Chief Minister And Governor

Uploaded Date: 13 May 2020

 

State

Capital

Chief Minister

Governor

Andhra Pradesh

Hyderabad

Yeduguri Sandinti Jaganmohan Reddy 

Shri. Biswabhusan Harichandan

Arunachal Pradesh

Itanagar

Prema Khandu

Brigedier B.D.Mishra

Assam

Dispur

Sarbananda Sonowal

Professor Jagdish Mukhi

Bihar

Patna

Nitish Kumar

Phagu Chauhan

Chhattisgarh

Raipur

Bhupesh Baghel 

Shri Anusuiya Uikey

Goa

Panaji

Pramod sawant 

Satya Pal Malik

Gujarat

Gandhinagar

Shri Vijay Rupani

Acharya Devvrat

Haryana

Chandigarh

Manohar Lal Khattar

Satyadev Narayan Arya

Himachal Pradesh

Shimla

Jai Ram Thakur

Bandaru Dattatreya

Jammu and Kashmir

Srinagar (summer), Jammu (winter)

-

Sh. Girish Chandra Murmu (L.G)

Jharkhand

Ranchi

Hemant Soren

Shri Draupadi Murmu

Karnataka

Bengaluru

Shri Bookanakere Siddalingappa Yediyurappa

Vajubhai Rudabhai Vala

Kerala

Thiruvananthapuram

Shri Oommen Chandy

P. Sathasivam

Madhya Pradesh

Bhopal

Shri Shivraj Singh Chouhan

Shri Lal Ji Tandon

Maharashtra

Mumbai

Uddhav Balasaheb Thackeray

Bhagat Singh Koshyari

Manipur

Imphal

Shri Nongthombam Biren Singh

Najma Akbar Ali Heptulla

Meghalaya

Shillong

Conrad Kongkal Sangma

Ravindra Narayana Ravi

Mizoram

Aizawl

Zoramthanga

P.S Sreedharan Pillai

Nagaland

Kohima

Neiphiu Rio

Shri R. N. Ravi

Odisha

Bhubaneswar

Sh. Naveen Patnaik

Shri Ganeshi Lal

Punjab

Chandigarh

Captain Amarinder Singh

Shri Vijayender Pal Singh Badnore

Rajasthan

Jaipur

Ashok Gehlot

Kalraj Mishra

Sikkim

Gangtok

Shri Prem Singh Tamang

Ganga Prasad Chaurasia

Tamil Nadu

Chennai

Karuppa Gounder Palanisamy

Banwarilal Purohit

Telangana

Hyderabad

K Chandrasekhar Rao

Dr. Tamilisai Soundararajan

Tripura

Agartala

Biplab Kumar Deb

Ramesh Bais

Uttar Pradesh

Lucknow

Yogi Adityanath

Anandiben Patel

Uttarakhand

Dehradun

Trivendra Singh Rawat

Baby Rani Maurya

West Bengal

Kolkata

Km. Mamata Banerjee

Jagdeep Dhankhar

Union Territories

 

Chief Minister

Lieutenant Governor

Andaman & Nicobar

Port Blair

-

Admiral D.K.Joshi (Lieutenant-Governor)

Chandigarh

Chandigarh

-

Shri V.P.Singh Badnore (Administrator)

Dadra and Nagar Haveli

Silvassa

-

Shri Praful Patel (Administrator)

Daman and Diu

Daman

-

Shri Praful Patel (Administrator)

Delhi

Delhi

Arvind Kejriwal

Anil Baijal (Lieutenant-Governor)

Lakshadweep

Kavaratti

-

Shri Dineshwar Sharma (IPS, Administrator)

Pondicherry

Pondicherry

Shri Velu Narayanasamy

Dr. Kiran Bedi (Retd. Lt. General)

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पंचायती राज

Uploaded Date: 27 April 2020

 

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत, तालुका समिति और जिला परिषद आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु  द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई।

भारतीय सविधान  के अनुच्छेद 40 में राज्यों को पंचायतो के गठन का निर्देश दिया गया है। 1991 में संविधान में 73वा सविधान संसोधन 1993  करके पंचायत राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दे दी गयी है।

24 अप्रैल 1993 भारत में पंचायती राज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मार्गचिन्ह था क्योंकि इसी दिन संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम, 1992 के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा हासिल हुआ और इस तरह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के स्वप्न को वास्तविकता में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।

पंचायती राज की प्रमुख बाते

73वें संशोधन अधिनियम, 1992 में निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं:

  1. एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या मध्यवर्ती पंचायत तथा जिला पंचायत)
  2. ग्राम स्तर पर ग्राम सभा की स्थापना
  3. हर पांच साल में पंचायतों के नियमित चुनाव
  4. अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण
  5. महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण
  6. पंचायतों की निधियों में सुधार के लिए उपाय सुझाने हेतु राज्य वित्ता आयोगों का गठन
  7. राज्य चुनाव आयोग का गठन
  8. 73वां संशोधन अधिनियम पंचायतों को स्वशासन की संस्थाओं के रूप में काम करने हेतु आवश्यक शक्तियां और अधिकार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को अधिकार प्रदान करता है। ये शक्तियां और अधिकार इस प्रकार हो सकते हैं:

(1) संविधान की गयारहवीं अनुसूची में सूचीबध्द 29 विषयों के संबंध में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना और उनका निष्पादन करना

(2) कर, डयूटीज, टॉल, शुल्क आदि लगाने और उसे वसूल करने का पंचायतों को अधिकार

(3) राज्यों द्वारा एकत्र करों, डयूटियों, टॉल और शुल्कों का पंचायतों को हस्तांतरण

ग्राम सभा किसी एक गांव या पंचायत का चुनाव करने वाले गांवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था है।

गतिशील और प्रबुध्द ग्राम सभा पंचायती राज की सफलता के केंद्र में होती है।

राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे:-

पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार ग्राम सभा को शक्तियां प्रदान करें।

गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अवसर पर देश भर में ग्राम सभा की बैठकों के आयोजन के लिए पंचायती राज कानून में अनिवार्य प्रावधान शामिल करना।

पंचायती राज अधिनियम में ऐसा अनिवार्य प्रावधान जोड़ना जो विशेषकर ग्राम सभा की बैठकों के कोरम, सामान्य बैठकों और विशेष बैठकों तथा कोरम पूरा न हो पाने के कारण फिर से बैठक के आयोजन के संबंध में हो।

ग्राम सभा

ग्राम सभा के सदस्यों को उनके अधिकारों और शक्तियों से अवगत कराना ताकि जन भागीदारी सुनिश्चित हो और विशेषकर महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों जैसे सीमांतीकृत समूह भाग ले सकें।

ग्राम सभा के लिए ऐसी कार्य-प्रक्रियाएं बनाना जिनके द्वारा वह ग्राम विकास मंत्रालय के लाभार्थी-उन्मुख विकास कार्यक्रमों का असरकारी ढंग़ से सामाजिक ऑडिट सुनिश्चित कर सके तथा वित्तीय कुप्रबंधन के लिए वसूली या सजा देने के कानूनी अधिकार उसे प्राप्त हो सकें।

ग्राम सभा बैठकों के संबंध में व्यापक प्रसार के लिए कार्य-योजना बनाना।

ग्राम सभा की बैठकों के आयोजन के लिए मार्ग-निर्देश/कार्य-प्रक्रियाएं तैयार करना।

प्राकृतिक संसाधनों, भूमि रिकार्डों पर नियंत्रण और समस्या-समाधान के संबंध में ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर जागरूकता पैदा करना।

73वां संविधान संशोधन अधिनियम ग्राम स्तर पर स्व-शासन की संस्थाओं के रूप में ऐसी सशक्त पंचायतों की परिकल्पना करता है जो निम्न कार्य करने में सक्षम हो:

ग्राम स्तर पर जन विकास कार्यों और उनके रख-रखाव की योजना बनाना और उन्हें पूरा करना।

ग्राम स्तर पर लोगों का कल्याण सुनिश्चित करना, इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, समुदाय भाईचारा, विशेषकर जेंडर और जाति-आधारित भेदभाव के संबंध में सामाजिक न्याय, झगड़ों का निबटारा, बच्चों का विशेषकर बालिकाओं का कल्याण जैसे मुद्दे होंगे।

73वें संविधान संशोधन में जमीनी स्तर पर जन संसद के रूप में ऐसी सशक्त ग्राम सभा की परिकल्पना की गई है जिसके प्रति ग्राम पंचायत जवाबदेह हो।

ग्राम सभा 1993 की धारा 6(1) के अनुसार राज्यपाल द्वारा अनुसूचित किया गया की एक ग्राम सभा होगी ! धारा 8 पचायतो का गठन और धारा 9 द्वारा पंचायत अवधि का प्रावधान किया गया !

प्रमुख समितिया :

1. बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें (1957)

2. अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977) 

3. जी वी के राव समिति (1985) 

4. डॉ एल ऍम सिन्घवी समिति (1986) 

5. ग्राम सभा को ग्राम पंचायत के अधीन किसी भी समिति की जाँच करने का अधिकार

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Most Important Previous Exam Vocabulary

Uploaded Date: 23 April 2020

 

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Algebra Formula For Class 9th, 10th, SSC And All Competitive Exam

Uploaded Date: 23 April 2020

 

Important Algebraic Formula

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Delhi polytecnic CET-2020 Exam Pattern

Uploaded Date: 19 April 2020

 


 

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How to Fill Delhi University Application Form 2020

Uploaded Date: 18 April 2020

 

How to Fill Delhi University Application Form 2020

Delhi University 2020 Application Form for UG & PG courses will be started from 2nd April 2020. Delhi University offers education in different fields like engineering, law, management, science, arts, commerce and many other fields. This university offers admission on the basis of Delhi University Entrance Exam and merit list of the qualifying examination. Here students can check step by step guide for How to Fill Delhi University Application Form 2020.

How to fill DU Application Form 2020?

If we summarize the whole process of filling the DU application form, the following fours steps can be derived-

Steps to Fill DU Application Form

Step 1. Registration

Step 2. DU Admission Form filling

Step 3. Upload Documents

Step 4. Payment of DU application form

DU Admission 2020 Eligibility Criteria

Candidates can check the eligibility criteria for DU Admission 2020 below.

Undergraduate Courses

Candidates are required to have passed the std. 12th examination in 10+2 pattern from CBSE or its equivalent examination. There is no minimum age requirement for the candidates.

Postgraduate Courses

Candidates are required to have a Bachelor’s degree in the concerned course for which they want to apply. DU has not set any minimum age requirements for the candidates.

Ph.D courses

Candidates are required to have a Postgraduate degree in the concerned course from a recognized university/institution for which they want to apply.

Documents Required for DU Admission Form 2020

Candidates are required to be ready with the below given documents to fill the DU Admission Form 2020 below.

  • Passport Size Photograph of the candidate
  • Scanned signature of the candidate
  • Self-attested Class XII Mark-Sheet
  • Self-attested copy of Caste certificate (if applicable)
  • Self-attested copies of Sports/ECA certificates (if applicable)

    For More Detail Please Visit Delhi University Official Website

    http://admission.du.ac.in/

   About Delhi University

The University of Delhi is a premier university of the country with a venerable legacy and international acclaim for highest academic standards, diverse educational programmes, distinguished faculty, illustrious alumni, varied co-curricular activities and modern infrastructure. Over the many years of its existence, the University has sustained the highest global standards and best practices in higher education. Its long-term commitment to nation building and unflinching adherence to universal human values are reflected in its motto: 'Nishtha Dhriti Satyam' 'निष्ठा धृति सत्यम्' (Dedication, Steadfastness and Truth). 

Established in 1922 as a unitary, teaching and residential University by the Act of the then Central Legislative Assembly, a strong commitment to excellence in teaching, research and social outreach has made the University a role-model and trend setter for other universities. The President of India is the Visitor, the Vice-President is the Chancellor and the Chief Justice of the Supreme Court of India is the Pro-Chancellor of the University. Beginning with three colleges and 750 students, it has grown as one of the largest universities in India with 16 faculties, over 80 academic departments, an equal number of colleges and over seven lakh students. Over 500 programmes offered by the University are approved by Academic and Executive Councils, out of which 209 programmes are being considered for NAAC accreditation purpose. The rest being run in colleges are separately accredited. 

Drawing students and faculty from across India and abroad, the University has emerged as a symbol of excellence, integrity and openness of mansa (thought), vaacha (speech) and karmana (action).

Sir Maurice Gwyer,  the then Vice-Chancellor, realizing  the  importance  of a  distinguished  faculty to  act as role models,  relentlessly searched for talent all over  the  country  and roped in men of eminence to this University, such as Prof. D.S. Kothari in Physics, Prof. T.R. Sheshadri in Chemistry, Prof. P Maheshwari in Botany and Prof. M L Bhatia in Zoology.

Five Departments namely Chemistry, Geology, Zoology, Sociology and History have been awarded the status of the Centres of Advanced Studies. These Centres of Advanced Studies have carved a niche for themselves as centres of excellence in teaching and research in their respective areas. In addition, a good  number  of University  departments are  also receiving   grants under   the  Special   Assistance Programme of the UGC in recognition of their outstanding academic work. 10 Departments (Germanic & Romance Studies, Hindi, Persian, Geography, Music, East Asian Studies, Anthropology, Mathematics, B.R.Ambedkar, M. I.L.) are getting grants under DRS, 2 Departments (Buddhist Studies, English) are getting grants under DSA, 3 Departments (English, Buddhist Studies, Social Work) are getting grants under AISHSS and 3 Departments (African Studies, East Asian Studies, Developing Countries Research Centre) are getting grants under Area Studies Programmes. Department of Adult, Continuing Education and Extension and Women’s Studies & Development Centre of the University are also getting special funding from UGC. The University today boasts of as many as 15 big libraries apart from libraries in colleges. The University Science Instrumentation Centre (USIC) which is now situated close to the Physics and Chemistry Departments houses a number of sophisticated and high-end research instruments. These instruments are used quite frequently by Teachers and Research Scholars of postgraduate departments of the University as well as by many other institutions in Delhi and its neighbourhood. The University has recently laid fibre-optic network in the North and the South Campuses connecting all colleges and departments.

When the University of Delhi expanded in many directions to keep pace with a rapidly growing city, South Campus was established in 1973 to facilitate access for the residents of South Delhi. It moved to its present location on Benito Juarez Road, near Dhaula Kuan, in 1984. The Campus is now spread across 69 acres of green, hilly terrain and its buildings blend attractively with the natural surroundings. The various departments are located in the Faculty of Arts and the Faculty of Inter-disciplinary and Applied Sciences. S.P. Jain Centre for Management Studies is also located at the South Delhi Campus. Besides these, the Campus has a good library, a Health Centre, a Bank, a Post Office, DTC Pass Section and administrative and examination blocks. South Campus also provides some residential quarters for faculty members and the non-teaching staff. Outstation students are offered accommodation in three hostels.

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RRB NTPC GROUP ‘C’ SYLLABUS

Uploaded Date: 13 April 2020

 

RRB NTPC GROUP ‘C’ SYLLABUS

There are around 9 posts which fall under Group C.

The First stage is CBT (Computer Based Test) in which Tier-1 and Tier-2 objective type exam.

Syllabus for Tier-1 and Tier-2 Exam

 

General Awareness

  • General Knowledge
  • Current Affairs
  • Book / Author
  • Abbreviations
  • Awards
  • International and National Organization
  • Budget
  • History
  • Geography
  • Environment
  • Indian Economy
  • General Science

 

Arithmetic

  • Data Interpretation
  • Profit And Loss
  • Simple Interest
  • Compound Interest
  • Mensuration
  • HCF And LCM
  • Time And Work
  • Time and Distance
  • Work And Wages
  • Simplification
  • Algebra
  • Percentage
  • Number System
  • Decimal Fraction

 

General Intelligence And Reasoning

  • Problem Based On Ages
  • Direction Test
  • Arithmetic Reasoning
  • Mathematical Operation
  • Classification
  • General Reasoning
  • Mental Ability
  • Ranking
  • Coding – Decoding
  • Alphabet Series
  • Decision Making
  • Blood Relation
  • Verbal Reasoning

 

Test No.

Test Name

 

Duration

Test 1

Intelligence Test

Instruction Time

05 minutes

Number of Question

35

Time Limit

10 minutes

Break Time

01 minute

Test 2

Selective Attention Test

Instruction Time

05 minutes

Number of Question

30

Time Limit

08 minutes

Break Time

01 minute

Test 3

Spatial Scanning Test

Instruction Time

05 minutes

Number of Question

40 (10x4=40)

Time Limit

08 minutes

Break Time

01 minute

Test 4

Information Ordering Test

Instruction Time

10 minutes

Number of Question

25

Time Limit

10 minutes

Break Time

01 minute

Test 5

Personality Test

Instruction Time

05 minutes

Number of Question

35

Time Limit

12 minutes

Feedback

Number of Statements

14

Time Limit

06 minutes

Total Time Limit

88 minutes (including feedback time)

 

 

RRB NTPC TYPING SKILL TEST

Typing skill test is conduct for candidates who apply for the post of Junior Account Assistant Cum Typist, Senior Clerk Cum Typist And Senior Time Keeper and have cleared the Tier-1 and Tier-2 written test. Typing Test is of qualifying nature.

The test can be taken in English or Hindi.

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Apply For Temporary Ration Coupon

Uploaded Date: 09 April 2020

 

Delhi Ration Card 2020: Temporary ration card, e-ration card status, (फॉर्म) दिल्ली राशन कूपन Apply online

भारत में फैले कोरोना वायरस महामारी के कारण सबसे अधिक प्रभावित अगर कोई हुआ है तो वो है गरीब निम्न वर्ग | इनमे अधिकतर गरीब दिहाड़ी मजदूर शामिल है जो रोज कमाते और खाते है | इनके सामने सबसे बड़ा संकट दो वक्त की रोटी का है | इसी के तहत बोहोत सी राज्य सरकारों ने पहल करते हुए गरीबो के लिए मुफ्त भोजन और रासन की व्यवस्था की है | अगर हम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करे तो दिल्ली की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है लेकिन 72 लाख ऐसे लोग है जिनके राशन कार्ड है |

दिल्ली में काफी जनसंख्या ऐसे लोगो की है जो दुसरे राज्यों से यहाँ काम की तलाश में आते है और lockdown के कारण यहाँ फस गए है | इसी लिए दिल्ली सरकार ऐसे सभी लोगो के लिए फ्री राशन की व्यवस्था का प्रबंध करने जा रही है |

कैसे करे आवेदन

Delhi Temporary Ration Card Coupon

  1. सबसे पहले वेबसाइट delhi.gov.in होमपेज खुल जायेगा।
  2. वेबसाइट पर “Apply for Temporary Ration Coupon” पर क्लिक कर दे।
  3. मोबाइल नंबर दर्ज करके Submit बटन पर क्लिक कर दे।
  4. मोबाइल OTP वेरीफाई कर दे।
  5. Submit बटन पर क्लिक कर New Application विकल्प पर क्लिक क्लिक कर दे।
  6. आपके सामने दिल्ली राशन (Delhi Ration Coupon) फॉर्म खुल जायेगा।
  7. इस Temporary Ration Coupon पंजीकरण फॉर्म में जानकारी दे।।
  8. फॉर्म में संभावित दस्तावेजों अपलोड कर Proceed पर क्लिक देना|
  9. मोबाइल पर अद्वितीय संख्या जाएगी|
  10. राशन प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड के साथ अद्वितीय संख्या राशन केंद्र पर दे।

Types of Delhi Ration Card

There are four types of Ration Card are as follows:

BPL: This type of card is given to those families who are under the Below Poverty Line. The Government of Delhi provides essential commodities and food-grains at affordable prices.

APLAPL ration card is issued to the families lies between above the poverty line and below the medium class. Under this scheme, the Delhi Government is not liable to issue essentials food at subsidized prices.

AAY CardsAntyodaya Yojana is issued to the person who is financially weaker in comparison to the other classes. The Government is liable to provide essential commodities at very affordable prices.

AY:  A Person under the Annapurna Yojana will get 10kg of food grains every month at free of cost. Only those persons are eligible for this card who is more than 65 years of age and not earning.

The person who is not availing the Old Age Pension or State Pension Scheme is entitled to get Annapurna Yojana Ration Card.

Temporary Ration Coupon: Launched to combat the covid-19 lock-down situation.

 Eligibility criteria For Permanent Delhi Ration Card

  • In order to apply for the new ration card, one should be a permanent citizen of Delhi.
  • One should not hold an old ration card if he/she is applying for a new ration card.
  • Needs to produce income proof to apply for the APL and BPL Ration card.
  • For those who had recently married, they need to apply for the new ration card
  • To apply for the Annapurna Yojana an applicant should not earn money through any source and are not receiving pension money from any pension scheme run by the central or state government.

Documents Required To Apply for New Delhi Ration Card Application

The documents required to submit at the time submitting application form are given below:

  • In order to apply for an online application or offline application, the applicant needs to submit the passport size photograph of each family member which should be attested by the gazette officer.
  • Needs to submit residential proof and the list of residential proof are given below:
  • Electricity Bills
  • Telephone Bill
  • Bank Passbook  
  • house rent receipt

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Merger Of Banks

Uploaded Date: 04 April 2020

 

(1) Oriental Bank of Commerce (OBC) and United Bank of India will be merged into Punjab National Bank (PNB). After the merger, these two lenders will form the second-largest public sector bank in the country, after State Bank of India (SBI).

(2) Syndicate Bank will now be a part of Canara Bank, which will make it the fourth-largest public sector lender.

(3) Indian Bank will be amalgamated with Allahabad Bank.

(4) Union Bank of India will be merged with Andhra Bank and Corporation Bank.

(5) Customers, including depositors of merging lenders will be treated as customers of the banks in which these banks have been amalgamated with effect from 1 April 2020.

(6) Post the merger, there will be 12 Public Sector Banks, six merged banks and six independent public sector banks.

  • Six merged banks are State Bank of India, Bank of Baroda, Punjab National Bank, Canara Bank, Union Bank of India, Indian Bank
  • Six independent banks are Indian Overseas Bank, Uco Bank, Bank of Maharashtra, Punjab and Sind Bank, Bank of India, Central Bank of India.

7) The Oriental Bank of Commerce and United Bank of India will now be operating as the branches of the Punjab National Bank from tomorrow (1 April 2020).

8) Syndicate Bank will function as the branch of Canara Bank effective 1 April 2020.

9) Similarly, all Allahabad Bank branches will be now treated as branches of the Indian Bank.

10) All branches of Andhra Bank and Corporation Bank will function as Union Bank of India branches with effect from today i.e. 1 April, 2020.

Earlier this month the cabinet gave the go-ahead for the mergers that will amalgamate operations of 10 public sector banks (PSBs) into four ‘mega banks.

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UPSC IAS Exam Pattern 2020

Uploaded Date: 03 April 2020

 

UPSC IAS Exam Pattern 2020

When a candidate starts preparation he/she must know the exam pattern of IAS exam. A complete knowledge of exam pattern will give an edge to the aspirant.

UPSC IAS 2020 Exam will be conduct in three different stages:

  • Preliminary Exam
  • Mains Exam
  • Interview

Candidates who clear all three stages will be granted the offer letter by Union Public Service Commission.

IAS PRELIMS Exam Pattern

The Prelims Exam Consists of GS (General Studies) & CSAT (Civil Service Aptitude Test). All candidates appearing in the Preliminary Exam must qualify the cut-off.

Exam Pattern:

Paper

No. of Question

Total Marks

Duration

Nature of paper

Paper-1

(General Studies)

100

200

2 hours

Considered for cut off

Paper-2

(General Studies)

80

200

2 hours

Qualifying Nature

 

Negative Marking: 1/3rd of the total allotted marks of a particular question will be deducted if the question is attempted wrong.

Important Points:

  • All Questions in UPSC IAS Prelims Exam will be of objective nature. MCQs (Multiple Choice Questions) will be asked in the Preliminary Exam.
  • The CSAT Paper will be of qualifying nature and it is mandatory for all candidates to score a minimum of 33% in the paper to qualifying Preliminary Exam.
  • Each question of General Studies (Paper-1) consist of 2 marks
  • Each question asked in General Studies (Paper-2) consist 2.5 marks.
  • Visually Impaired Candidates will be given an additional time of 20 minutes (Each Paper) to complete the Preliminary exam.
  • The Question Paper will be bilingual. Question asked both English & Hindi.
  • It is mandatory for all aspirants to appear in both the papers of Prelims to qualify for the Mains Exam.
  • The score of Preliminary Exam is just for screening purpose, thus the score of this exam will not be considered in the final evaluation of the candidates when the final result id declared after the interview.

IAS MAINS EXAM PATTERN:

Mains Exam has two type of Papers One will be of qualifying nature and other will be of merit purpose.

Paper

Subject

Total Marks

Duration

Paper A

One of the Indian Language to be selected by the candidate from the Languages include in the Eight Schedule of the Constitution

300

3 hours

Paper B

English

300

3 hours

Paper 1

Essay

250

3 hours

Paper 2

General Studies-1 (Indian Heritage and Culture, History and Geography of the world and Society)

250

3 hours

Paper 3

General Studies-2 (Governance, Constitution, Polity, Social Justice and International relations)

250

3 hours

Paper 4

General Studies-3 (technology, Economic Development, Bio-diversity, Environment, Security and Disaster Management)

250

3 hours

Paper 5

General Studies-4 (Ethics, Integrity and Aptitude

250

3 hours

Paper 6

Optional Subject (Paper-I)

250

3 hours

Paper 7

Optional Subject

(Paper-II)

250

3 hours

 

Total Marks Of Mains Exam 1750.

 

Important Points Of Mains Exams:

  • All the papers are of merit nature except the language Papers A and B
  • Paper A and B are qualifying nature
  • All the paper is descriptive means you have to write the answer it is not a MCQs exam.
  • Candidate need to score a minimum of 25% marks in all paper 1 to 7.
  •  Paper A is not compulsory for candidates from the state of Arunachal Pradesh, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland and Sikkim.
  • The Indian Language Paper cover any of the languages include in the 8th schedule of the constitution.
  • All papers asked in both language English and Hindi.

Interview Process:

 All the candidates are called for the final Interview and personality test that is counted as the part of merit list.

Boards of recruiters sit together and ask candidates questions related to his/her field.

Some of the important qualities that the board looks for are:

  • Mental Alertness
  • Critical Powers Of Assimilation
  • Clear And Logical Exposition
  • Balance Of Judgment
  • Variety And Depth Of Interest
  • Ability For Social Cohesion And Leadership
  • Intellectual And Moral Integrity

The Maximum marks allotted for the interview stage is 275. Total numbers of marks for the merit list is 2025

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कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट

Uploaded Date: 30 March 2020

 

कोरोना महामारी के कारण सम्पूर्ण विश्व में एक बोहोत बड़ी health emergency जैसे हालत है | यह महामारी 186 देशो मैं कहर बनकर टूटी है | जिसका एक नकारात्मक प्रभाव आर्थिक जगत पर हुआ है | S & P ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने भारत की विकास दर को 5.2% से घटाकर 2.5% पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है |

एशिया महादीप में पैदा होगी आर्थिक मंदी

प्रमुख अर्थशास्त्री शान रोशे के अनुसार कोरोना महामारी के कारण पहली तिमाही में चीन, अमेरिका और यूरोप में शटडाउन और विषाणु संक्रमण के कारण बड़ी मंदी पैदा होगी |

चीन, जापान और भारत की विकासदर घटने का अनुमान

S & P के अनुसार चीन, भारत और जापान की विकासदर क्रमशः 2.9%, 2.5% व – 1.2% रहने का अनुमान है |

प्रमुख रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी घटाया GDP ग्रोथ का अनुमान

इससे पहले को रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने भी कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को देखते हुए 2020 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 5.3 फीसदी कर दिया था। मूडीज ने फरवरी में कहा था कि 2020 में भारत की जीडीपी 5.4 फीसदी की रफ्तार से वृद्धि कर सकती है। हालांकि यह भी पहले के 6.6 फीसदी के अनुमान से घटाया गया था। एजेंसी ने 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 5.8 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया।

RBI द्वारा किये गए कुछ महत्वपूर्ण कदम

कोरोनावायरस और उसके आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए सरकार के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत की कटौती की है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि रेपो दर को मौजूदा समय में 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत किया गया है. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के 6 सदस्यों में से चार ने इस कदम के पक्ष में वोट किया है. इससे होम लोन समेत अन्य कर्जों की ईएमआई में कमी आने की उम्मीद है. आर्थिक नरमी को दूर करने के लिए आरबीआई इससे पहले भी कई बार नीतिगत ब्याज दर में कटौती कर चुका है. साथ ही बैंकों को दरों में पर्याप्त कटौती करने का भी निर्देश दिया था. 

RBI ने दिए बैंको को 3 महीने EMI में राहत देने के आदेश

RBI ने सभी बैंक्स को अपने ग्राहकों को 3 माह की EMI बाद में लेने या आगे बढ़ाने की सलाह दी है अगर आप नहीं चाहते तो बैंक आपसे 3 माह की EMI नहीं लेंगे ओर आप डिफाल्टर भी नहीं होंगे | इसे आप इस तरह समाज सकते है जो आपकी EMI 24 महीने की थी वह 3 महीने आगे बढ़ जाएगी वो 27 महीने की हो जाएगी |

RBI ने दी सभी ग्राहकों के पैसे सुरक्षित रखने की गारंटी

RBI ने सभी ग्राहकों को उनके पैसे सुरक्षित रखने का भरोसा दिया | देश में कोरोना के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए बोहोत से ग्राहकों के मन में दुविधा थी जिसे RBI ने आज पूरी तरह से ख़तम कर दिया |

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ डोक्टर, नर्स और पेरामेडिकल स्टाफ को मिलेगा 50 लाख का बीमा कवर

भारत सरकार ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को एक बड़ा तौफा दिया हे इस संकट की घडी में सबसे अधिक रिस्क में स्वस्थ्य कार्यकर्ता कार्य कर रहे है उनकी चिंता को देखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा ये कदम उठाया गया है |

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INDIAN RAILWAY

Uploaded Date: 29 March 2020

 

India Railway is the fourth largest railway network in the world by size. The total route length 67,368 km. About 57.91% routes are electrified. 33% are double or multiple tracks.

Indian Railway runs more than 20,000 passengers trains daily. The trains have five digit and four digit numbering system.

Some Important Things to Highlight

1. It is a part of government of India.

2. It is founded 8th May 1845.

3. The headquarters of Indian Railway in New Delhi India.

4. Piyush Goyal is the Railway Minister.

5. Indian Railway is the lifeline of the country. It provides many servicers like Passenger railways, freight services, parcel carrier, Catering and tourism services, and parking lot operation.

6. Total Revenue generated by Indian Railway is Rs 1.97214 trillion. Net income worth Rs 60.14 billion.

7.  About 1.30 million employees of ministry of railway.

8. Indian railway divided in 18 zones.

History

The first railway proposals for India were made in Madras in 1832. The country's first train, Red Hill Railway (built by Arthu Cotton to transport granite for road-building), ran from Red Hills to the Chintadripet bridge in Madras in 1837. In 1845, the Godavari Dam Construction Railway was built by Cotton at Dowleswaram in Rajahmundry, to supply stone for the construction of a dam over the Godavari River. In 1851, the Solani Aqueduct Railway was built by Proby Cautley in Roorkee to transport construction materials for an aqueduct over the Solani River.

India's first passenger train, hauled by three steam locomotives (Sahib, Sindh and Sultan), ran for 34 kilometres (21 mi) with 400 people in 14 carriages on 1676 mm (5 ft 6 in) broad gauge track between Bori Bunder (Mumbai) and Thane on 16 April 1853. The Thane viaducts, India's first railway bridges, were built over the Thane creek when the Mumbai-Thane line was extended to Kalyan in May 1854. Eastern India's first passenger train ran 39 km from Howrah, near Kolkata, to Hoogly on 15 August 1854. The first passenger train in South India ran 97 km from Royapuram- Veyasarapady (Madras) to Wallajah Road (Arcot) on 1 July 1856.

On 24 February 1873, a horse-drawn 3.8 km (2.4 mi) tram opened in Calcutta between Sealdah and Armenian Ghat Street. On 9 May 1874, a horse-drawn tramway began operation in Bombay between Colaba and Parel. In 1897, lighting in passenger coaches was introduced by many railway companies. On 3 February 1925, the first electric passenger train in India ran between Victoria Terminus and Kurla.

The organization of Indian railways into regional zones began in 1951, when the Southern (14 April 1951), Central (5 November 1951), and Western (5 November 1951) zones were created. Fans and lights were mandated for all compartments in all passenger classes in 1951, and sleeping accommodations were introduced in coaches. In 1956, the first fully air-conditioned train was introduced between Howrah and Delhi. Ten years later, the first containerized freight service began between Mumbai and Ahmedabad.

In 1974, Indian Railways endured a 20 day strike, which damaged the nation's economy.

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BANK PO EXAM PATTERN, SYLLABUS AND ELIGIBILITY

Uploaded Date: 28 March 2020

 

BANK PO EXAM CRITERIA ANA PATTERN:

Full form of PO is Probationary Officer is an Assistant Manager Of Scale-1 in a bank. SBI conduct its PO exam. Other banks PO exam is conducted by a board called IBPS (Institute of Banking Personnel Selection).

BANK PO SYLLABUS AND EXAM PATTERN:

Bank PO Exam Divided in three Phases. The first two phases is written exam. First written exam is called preliminary exam and second written exam is called mains exam. The third step is interview. After getting selected in these three phases a merit list is generated by the board based on the candidate’s performance. The one who passed in this is finally selected for the post of PO.

SYLLABUS:

The preliminary exam is divided into three sections:

1. Quantitative Aptitude  

2. Reasoning and Verbal Ability

3. English

The mains exam contain 5 sections

1. General Awareness

2. Computer Knowledge

3. Quantitative Aptitude

4. Reasoning and Verbal Ability

5. English

Bank PO Exam List OF Banks

Every year all the government as well as the private banks conducts Bank PO exams to recruit young officers. The major banks participating in this process are listed below:

• State Bank of India

• Allahabad Bank

• Bank of Baroda

• Bank of Maharashtra

• Punjab National bank

• Oriental Bank of Commerce

• ICICI Bank

• Cooperative Bank

• Cooperation Bank

• Syndicate Bank

• HDFC Bank

BANK PO SALARY

The basic pay of a SBI PO is Rs 23700. In additional the officer also eligible for Dearness Allowance (DA), House Rental Allowance (HRA), and Special Allowance etc.The total salary now become Rs 40,239.

BANK PO ELIGIBILITY:

Age Criteria: 21 – 30 years age relaxation as per government rule.

Education: Graduation from any recognized university in India.

ROLE OF A BANK PO:

A PO is trained on multiple verticals such as finance, accounting, billing, and investment etc. during his / her probation period in order to acquaint them with various working procedures of the bank. This is basically done by entrusting them with responsibilities and jobs in these categories.

The main purpose of the bank is to provide optimal service to its customers. A PO has to make sure that the business of the bank keeps on increasing by tending to the banks’ customers properly by handling customer complaints, addressing various customer related issues such as discrepancies in accounts, rectification of undue charges etc.

When they get acclimatized to the banks’ norms they are provided with more serious responsibilities such as planning, budgeting, loan processing, investment management etc.

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CORONA VIRUS (COVID-19) LIVE UPDATE

Uploaded Date: 24 March 2020

 

CORONA VIRUS (COVID-19) LIVE UPDATE

कोरोना वायरस एक ऐसी महामारी है जिससे आज पूरी दुनिया बुरी तरह प्रभावित है | जैसा कि हम सभी जानते है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है और न ही कोई वैक्सीन है | इसलिए social distancing ही इस रोग से बचने का एक मात्र उपाए है |

World Health Organisation के द्वारा जारी कि गए जानकारी के आधार पर इस महामारी कि शुरुआत China के वुहान शहर से हुई | China में अबतक 80,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हो चुके है जिसमे लगभग 3500 लोगो कि मौत हो चुकी है |

China के बाद ITALY इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है इटली में अबतक 33000 से अधिक लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए है और लगभग 5500 लोगो कि मौत हो चुकी है |

America में भी इस बीमारी से अबतक करीब 27000 लोग पीड़ित हो चुके है जिसमे से 600 लोगो कि मौत हो चुकी है |

दुनिया के सभी देशो के अगर हम ध्यान से देखे तो तो जिन देशो में भी ये बीमारी बड़े रूप में फैली है इसकी एक बड़ी वजह है इस बीमारी को गंभीरता से न लेना |

America जैसा देश जो world health index में नंबर 1 है वो भी आज इस बीमारी से बुरी तरह से प्रभावित है |

Itlay जैसे देश में आग आपातकाल कि स्तिथि है | स्पेन, इराक, कोरिया सभी देशो में बेहद ही ख़राब स्थिति है | जिसकी एक ही वजह हे लापरवाही | आज इन सभी देशो में lockdown कि स्तिथि है अगर ये देश पहले से ही social distancing और जरुरी कदम उठा लेते तो आज ये स्तिथि न होती|

अगर हम भारत कि बात करे तो भारत 130 करोड़ कि जनसंख्या वाला देश है और भारत world health index में 112 नंबर पर है अगर भारत में ये CORONA VIRUS (COVID-19) अगर बड़े स्तर पर फ़ैल गया तो हमारे लिए इसे रोक पाना असंभव हो जायेगा और चारो तरफ लाशो के ढेर लग जायेंगे |

इस बीमारी से बचेने का एक ही उपाए है जितना हो सके घर पर ही रहे | कुछ नियमो का पालन करे जैसे

1. हाथो को समय-समय पर साबुन से धोये |

2. किसी से हाथ न मिलाये और कम से कम 1 मीटर कि social distance बनाये रखे |

3. खासते और छीकते समय मुह पर रुमाल रखे |

4. Mask और Santizer का इस्तेमाल करे |   

Some world wide corona patient live update link:

India Live Update from Ministry of Health (Indian Government Site):

https://www.mohfw.gov.in/

 

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SSC EXAMS CRITERIA AND ELIGIBILITY

Uploaded Date: 23 March 2020

 

SSC (Staff Selection Commission)

Staff Selection Commission provides a dream government job which is a first choice of all candidates. SSC organize SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC CPO Exam.

SSC CGL EXAM CRITERIA

SSC CGL EXAM IS CONDUCT FOR THE FOLLOWING POST

  • Income Tax Inspector
  • Assistant Section Officer
  • Central Excise Inspector
  • Assistant Audit Officer
  • Assistant Enforcement Officer
  • Sub Inspector CBI
  • Divisional Accountant (CAG)

Qualification: Graduation

Age Limit: 18 to 27 Year age relaxation as per government rule.

Exam Type:

SSC conduct this exam in three phases. First phase is called Tier – 1 stage in this stage an exam is conduct for 1 hour. It’s a MCQ online exam. It is divided is four section each section contain 25 question. These four section are Mathematics (25 Question), English (25 Question), General Knowledge (25 Question), Reasoning (25 Question).

Those candidates who score minimum cutoff marks decided by the board eligible for the Tier-2 exams.In Tier-2 Exam we have two subject exam first subjects is Mathematics and second subject is English. For Mathematics Exam 2 hour time limit and 100 question. In this Tier-2 mains exam Mathematics exam is different for tier-1 mathematics exam in tier-1 exam main focus on elementary math’s but in mains exam main focused on advanced exam.

English exam also have 2 hour time and it has 200 questions.

Those candidates who qualified Tier-2 exam eligible for third and last phase of the exam.Tier-1 and Tier-2 both are objective exam in which we have four option and we have to choose one correct option but in third and last phase is a subjective exam in which we have to write the answer of three questions a essay, a letter and a question about the current affair. This exam is only qualifying exam in which a candidate only secure only 33% exam.

Those candidates who qualify in all three stage of exam are finally selected for document verification and medical examination.

 SSC CHGL EXAM CRITERIA

Qualification: 12 Passed From Any Recognize Board.

Age Limit: 18 to 27 Year age relaxation as per government rule.

Exam Type:

SSC conduct this exam in two phases. First phase is called Tier – 1 stage in this stage a exam is conduct for 1 hour. It’s a MCQ online exam. It is divided is four section each section contain 25 question. These four section are Mathematics (25 Question), English (25 Question), General Knowledge (25 Question), Reasoning (25 Question).

Those candidates who score minimum cutoff marks decided by the board eligible for the Tier-2 exams

Those candidates who qualified Tier-1exam eligible for Second and last phase of the exam.Tier-1 is objective exam in which we have four options and we have to choose one correct option but 2nd phase is a subjective exam in which we have to write the answer of three questions a essay, a letter and a question about the current affair. This exam is only qualifying exam in which a candidate only secure only 33% exam.

Those candidates who qualify in all three stage of exam are finally selected for document verification and medical examination.

SSC CPO EXAM CRITERIA

This exam is conduct by ssc for the Sub Inspector Post of Delhi Police, CISF, BSF, ITBP, SSB, CRPF etc. This exam have two main phase first phase is written exam and second phase is physical exam.

Qualification: Graduation

Age Limit: 18 to 27 Year age relaxation as per government rule.

Exam Type:

SSC conduct this exam in three phases. First phase is called Tier – 1 stage in this stage an exam is conduct for 1 hour. It’s a MCQ online exam. It is divided is four section each section contain 25 question. These four section are Mathematics (25 Question), English (25 Question), General Knowledge (25 Question), Reasoning (25 Question).

Those candidates who score minimum cutoff marks decided by the board eligible for the Tier-2 exams. In Tier-2 Exam we have to qualify English exam in which we have 2 hour time and it has 200 questions.

Those candidates who qualified Tier-2 exam eligible for third and last phase of the exam. Tier-1 and Tier-2 both are objective exam in which we have four option and we have to choose one correct option but in third and last phase is a subjective exam in which we have to write the answer of three questions an essay, a letter and a question about the current affair. This exam is only qualifying exam in which a candidate only secure only 33% exam.

Those candidates who qualify in all three stage of exam are finally selected for document verification and medical examination.

PHYSICAL EXAM CRITERIA:

RUNNING: 1600 meter in 6 min 30 sec

LONG JUMP: 12 feet

HIGH JUMP:  feet

SSC MTS EXAM CRITERIA:

Qualification: 10th Passed From Any Recognize Board.

Age Limit: 18 to 27 Year age relaxation as per government rule.

Exam Type:

SSC conduct this exam in two phases. First phase is called Tier – 1 stage in this stage a exam is conduct for 1 hour. It’s a MCQ online exam. It is divided is four section each section contain 25 question. These four section are Mathematics (25 Question), English (25 Question), General Knowledge (25 Question), Reasoning (25 Question).

Those candidates who score minimum cutoff marks decided by the board eligible for the Tier-2 exams

Those candidates who qualified Tier-1exam eligible for Second and last phase of the exam.Tier-1 is objective exam in which we have four options and we have to choose one correct option but 2nd phase is a subjective exam in which we have to write the answer of three questions a essay, a letter and a question about the current affair. This exam is only qualifying exam in which a candidate only secure only 33% exam.

Those candidates who qualify in all three stage of exam are finally selected for document verification and medical examination. 

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Indian Foreign Policy ( India - Bhutan Relation)

Uploaded Date: 21 March 2020

 

Indian Foreign Policy (भारत विदेश नीति)

भारत और भूटान सम्बन्ध

1. भारत और भूटान का सम्बन्ध काफी पुराना है |

2. भूटान के लोग बौद्ध संस्कृति को मनाने वाले है |

3. 747 ई. में पदम् संभव नामंक बौद्ध भिक्षु ने भूटान का दौरा किया था | भूटान में बौद्ध धर्म के प्रचार के श्रेय इन्हें ही जाता है |

4. भारत और भूटान का सम्बन्ध 747 ई. से ही है |

5. 1910 ई. में भूटान ब्रिटेन का गुलाम बना |

6. भारत और भूटान के बीच 1949 में एक मित्र संधि पर हस्ताक्षर हुआ जिसके तहत व्यापार, वाणिज्य, शांति जैसे समझोतों पर हस्ताक्षर हुए |

7. इस समझोते के तहत भारत भूटान की संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये रखेगा | अनुछेद 2 में ये बताया गया है की अगर भूटान विदेश सम्बन्ध करेगा तो भारत से पूछ कर करेगा | भारत भूटान के आन्तरिक मामलो में हस्ताक्षेप नहीं करेगा |

8. 1949 की संधि में ये भी कहा गया की भारत के लोग भूटान जाकर व्यापार कर सकते है और भूटान के लोग भारत में आकर व्यापार कर सकते है |

9. भूटान चाइना के लिए एक Buffer Country है | मतलब भूटान भारत और चाइना के बीच मद्यावर्ती विवाद की वजह है |

10. भारत और भूटान के लोग बिना वीजा के एक दुसरे के देश में आजा सकते है |

11. 6 अगस्त 2007 में 1949 की संधि पर सुधर किये गए और भूटान और भारत के संबंधो को बढ़ावा दिया गया जलवायु, स्वाथ्य, प्रोद्योगिकी, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि अनेक सबंदो पर सहमती बनी |

12. 1961 में भूटान और भारत ने आर्थिक, कूटनीति पन्चशील शिदांत को अपनाया |

13. भूटान 1971 में सयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना | इस प्रस्ताव को भारत ने सयुक्त राष्ट्र में रखा था |

14. 80 फीसदी व्यापार भूटान भारत के साथ ही करता है यह व्यापार कोलकाता बंदरगाह और राजमार्गो द्वारा होता है|

15. SBI BANK और बड़ोदा बैंक की शाखाये भूटान में भी है |

16. भारत भूटान से हाइड्रोपॉवर, खनिज, लकड़िया और रसायन की खरीद करता है और भूटान को खाद्य प्रदार्थ और मशीनरी का निर्यात करता है |

17. 2006 में भारत और भूटान के बीच व्यापार और वणिज्य समझोता हुआ था | इससे पहले भारत और भूटान के बीच केवल प्रशासनिक समझोता रहा है |

18. भारत और भूटान के बीच हुए कुछ प्रमुख प्रशासनिक समझोते

  • 1960 से 1980 तक
  • 1980 से 2000 तक
  • 2000 से अब तक

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भारत और कोरोना वायरस COVID - 19

Uploaded Date: 20 March 2020

 

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 मार्च 2020 को रात 8 बजे देश को संबोधित किया | उन्होंने विश्व में फैली महामारी covid 19 यानि कोरोना वायरस के बारे में देशवासियों को सबोधित किया | प्रधानमंत्री ने देशवासियों से 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू लगाने का आह्वान किया | प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी बताया की कोरोना वायरस चार चरणों में अपना असर दिखाता है देश अभी कोरोना के दुसरे चरण से गुजर रहा है | ये देखने में आया है की जिन देशो में ये महामारी बड़ी मात्रा में फैली है उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और ये तीसरे चरण में विस्फोट की तरह फैली |

ये जनता कर्फ्यू क्या है

प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू के बारे में बताया की ये जनता द्वारा खुद पर लगाया गया प्रतिबन्ध है प्रधानमंत्री ने देश के लोगो से 22 मार्च 2020 को सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक घरो से न निकलने की सलाह दी | मोदी जी ने लोगो से कहा की इस दौरान लोग अपने मोहल्लो या सोसाइटी में भी जमा न हो |

कोरोना वायरस के लक्षण

कोरोना के लक्षण बुखार जैसे ही है इसके शुरुवाती लक्षणों में सूखी खासी, बुखार, मांसपेशियों में खिचाव आदि है इसके लक्षणों में आगे 8 वे दिन सास लेने में तकलीफ आदि है |

बचाव

  1. हाथो को बार बार साफ़ करे |
  2. आंख, मुह, कान को बबर न छुए |
  3. अगर किसी को खासी बुखार हो तो उससे कम से कम 1 मीटर की दूरी बने रखे |
  4. खासते समय मुह पर रुमाल रक्खे |

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भारत - अमेरिका सम्बन्ध

Uploaded Date: 20 March 2020

 

 भारत और अमेरिका सम्बन्ध

1. भारत अमेरिका सम्बन्ध को शुरुआत करने का श्रेय अमेरिका के पूर्व राष्टपति (फ्रेंक्लिन डी रूस बेंट) को जाता है |

2. अटलांटिक चार्टर ने भी भारत और अमेरिका के बीच का हिस्सा था |

3. कई अमेरिकन मिसनरी भारत दौरे पर आये और उन्होंने भारतीय संस्कृति का अमेरिका में जाकर प्रचार प्रसार किया |

4. शीतयुद्ध के दौरान भारत अमेरिका सबंध में आगे नही बढ़ा इसका सबसे बड़ा कारण था की अमेरिका के द्वारा प्रचारित पूंजीवादी विचारधारा को भारत एक नए तरह का साम्राज्यवादी और उपनिवेशवाद मानता था |

5. भारत की स्वंत्रता के बाद कश्मीर मुद्दा भी भारत अमेरिका सबंध में एक रूकावट का कार्य किया ब्रिटेन और अमेरिका के कहने पर ही भारत कश्मीर मुददे को सयुंकत राष्ट्र में लेकर गया | भारत का यह दाव उल्टा पड़ गया क्योकि सयुंकत राष्ट्र में ब्रिटेन और अमेरिका ने भारत का विरोध किया क्योकि पाकिस्तान उसके लिए सोवियत संघ के खिलाफ एक महत्वपूर्ण साथी था |

6. पाकिस्तान शीतयुद्ध के दोरान पश्चमी संघ का हिस्सा बना SEATO (१९५४), SENTO (१९५५) में भागीदारी इसका महत्वपूर्ण उदहारण है |

7. पूरे शीतयुद्ध के दौरान भारत अमेरिका सम्बन्ध में सुधार देखने को नहीं मिला |

8. भारत चीन युद्ध और भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद भारत का सोवियत संघ की तरफ झुकाव भी इसका महत्वपूर्ण कारण था |

9. अमेरिका और भारत के सबंध को एक नई दिशा तब मिली जब शीतयुद्ध का अंत हुआ | और सोवियत संघ का विघटन हुआ |

10. यह वही साल था जब भारत में आर्थिक उदारीकरण का रास्ता अपनाया |

11. भारत के बगल में चीन की मौजूदगी ने भी भारत और अमेरिका का सबंध मजबूत करने भी मदद की |

12. भारत अमेरिका रक्षा कूटनीति इसकी शरुआत (1995) में आये किक लाईटर प्रस्ताव से होती हे इसी प्रस्ताव में भारत और अमेरिका नोसेना एवं वायू सेना में एक-दुसरे की सहायता करने के लिए तैयार होते है इसी को आगे बढ़ाते हुए उसी वर्ष भारत अमेरिका सैन्य अभ्यास की शुरुआत मालाबार छेत्र में होता है|

13. जब अमेरिका सेना प्रमुख किक लाईटर ने भारत को (1991) में भारत का दौरा किया था | तो भारत के तीनो सैन्य विभागों में अमेरिका के सहयोग करने की बात कही | (1991) में भारतीय थल सेना के साथ कुछ समझोते हुए | 1992, 1993 में इसी क्रम में नौसेना और वायु सेना के साथ कुछ रक्षा समझोते हुए | इसी को आगे बढाते हुए भारत और अमेरिकी ने मालाबार में तीन संयुक्त सेन्य अभ्यास किये |

14. भारत और अमेरिका के बीच पहला प्रमुख सैन्य समझोता सन (1995) में हुआ | यह सैन्य समझोता अगले दस साल के लिए था | सन (2005) में दूसरा सैन्य समझोते ने एक नई दिशा पकड़ी और यह 9 बिलियन डॉलर का हो गया |

            सन (2013) में भारत और अमेरिका सैन्य सहयोग ने एक सेधान्तिक रूप लिया प्रोद्योगिकी आदान-प्रदान और रक्षा व्यापार अब प्रमुख छेत्र थे उसी बीच अमेरिका से भारत में आठ बोईंग विमान ख़रीदा |

            भारत और अमेरिका सैन्य सम्बन्ध उथल पुथल भरा रहा हे भारत और अमेरिका के सैन्य सोच में वैचारिक मतभेद है अमेरिका सामूहिक सैन्य रक्षा में विश्वास रखता है जब की भारत स्वायतता में | 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान भारत चीन के खिलाफ कुछ शर्तो के साथ अमेरिकी सैन्य सहयोग के लिए तैयार हुआ | शर्ते यही थी अमेरिका भारत की विचारधारा का सम्मान करेगा और किसी भी तरह के सेन्य गटबंधन की बात नहीं करेगा |                     

भारत और अमेरिका परमाणु संधि 2008

भारत अमेरिका के सबंध को नई दिशा इसी संधि के बाद मिली भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझोता की शुरुआत 2007 में हुई थी |

जब जॉर्ज बुश अमेरिका के राष्ट्रपति थे पुरे एक साल तक कई दौर की बातचीत हुई | 2008 में इस संधि पर हस्ताक्षर किया गया उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति “बराक ओबामा “ तथा भारत के प्रधानमंत्री “डॉ मनमोहन सिंह “ थे | 

भारत का पडोसी देश चीन एक विशाल और ताकतवर साम्यवादी देश है चीन और अमेरिका के सबंध हमेशा सदेहपूर्ण रहा है | क्यूंकि दोनों की विचारधारा अलग है भारत अमेरिका सबंध का मजबूत होना | चीन को रोकने का एक प्रयास भी है ऐतिहासिक कारणों से चीन हमेशा अपनी जमीन को लेकर काफी सवेंदनशील रहा है Asian pacific शेत्र में अपना दबदबा कायम रखने के लिए भारत और अमेरिका को मिलाकर चीन को रोकना होगा | भारत ने २०वी सदी के अंत में परमाणु परिक्षण  किये | एक 1994 और 1997 में अमेरिका ने दोनों परमाणु परिक्षण का बहिष्कार किया |

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United Nation (सयुक्त राष्ट्र) For B.A (prog./ hons.) 3rd Year Students

Uploaded Date: 19 March 2020

 

United Nation (सयुक्त राष्ट्र)

सयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग (Organ of United Nation)

1. सचिवालय (Secretariat)

2. प्रन्यास परिषद् (Trusteeship Council)

3. आर्थिक व सामाजिक परिषद् (Economic And Social Council) (ECOSOC)

4. सुरक्षा परिषद् (Security Council) (UNSC)

5. अन्तराष्ट्रीय न्यायालय (International Court Of Justice) (ICJ)

6. महासभा (General Assembly) (UNGA)

1. सयुक्त राष्ट्र आम सभा (General Assembly)

आम सभा सयुक्त राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण अंग है | इसे विश्व संसद भी कहा जाता है | सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व आम सभा में होता है |सामान्यत: सभी सदस्य देशो से पाच प्रतिनिधि आम सभा में आत है लेकिन हर सदस्य देशो को एक म़त का अधिकार है | हर एक साल में आम सभा का एक सत्र आयोजित किया जा है | इसे सितम्बर से दिसम्बर के बीच आयोजित किया जाता है | यह सत्र एक से अधिक बार भी आयोजन किया जा सकता है | इसका आयोजन सभी सदस्य देश मिलकर करते है | तमाम उप्लाब्दियो के बावजूद आम सभा संगठित नहीं है | इसमें संगठन की कमी है | इसका क्रियान्वयन सदस्य देशो के क्रिया या प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है |

आम सभा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है –

1. सुरक्षा परिषद के दस आस्थाई सदस्यों को चुनना |

2. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् के सदस्यों को चुनना |

3. सुरक्षा परिषद् के सलाह से सयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव |

4. सुरक्षा परिषद् की सलाह पर सयुक्त राष्ट्र से नए सदस्यों को जोड़ना |

5. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के 15 न्यायाधीशो का चुनाव |

6. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस करना |

7. सयुक्त राष्ट्र के अन्य अंग अपनी वार्षिक रिपोर्ट आम सभा को सौपते है |

8. सयुक्त राष्ट्र का बजट तैयार करना |

2. सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (Security Council)

सुरक्षा परिषद् सयुक्त राष्ट्र का एक स्थायी अंग है | कार्यकारी प्रमुख की भूमिका भी सुरक्षा परिषद् ही निभाता है | सुरक्षा परिषद् के सदस्यों की संखिया 15 है | जिसमे से 5 स्थाई सदस्य और 10 अस्थाई सदस्य है | अस्थाई सदस्य 2 वर्षो के लिए चुने जाते है | फ्रांस, रूस, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन इसके 5 स्थाई सदस्य है |

  • सोवियत संघ के स्थान पर रूस 1992 में सुरक्षा परिषद् का स्थाई सदस्य बना |
  • चीन 1971 में सुरक्षा परिषद् का स्थाई सदस्य बना |
  • सयुक्त राष्ट्र सविधान के अनुछेद 27 के अनुसार पाच स्थाई सदस्यों को वीटो पॉवर प्राप्त है |
  • कोई भी अस्थाई सदस्य लगातार 2 कार्यकाल के लिये सुरक्षा परिषद् का सदस्य नहीं बन सकता |
  • किसी भी मुददे पर निर्णय लेने के लिए 15 में से 9 सदस्यों की मत की जरुरत होती है | कई मामलो में स्थाई सदस्यों को वीटो पवार का अधिकार होता है |
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के 15 न्यायाधीशो के चुनावों में सुरक्षा परिषद् की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है |

सुरक्षा परिषद् के मुख्यतः तीन उद्देश्य है

  1. अंतर्राष्ट्रीय शांति को बनाये रखना |
  2. निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देना
  3. हथियारों के उत्पादन को सीमित करना |

सयुक्त राष्ट्र ने कई अंतर्राष्ट्रीय घटनाओ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है -

क्यूबा संकट, शीतयुद्ध, खाड़ी युद्ध, सोवियत संघ का विघटन, 1965 का भारत पकिस्तान युद्ध इत्यादि में सुरक्षा परिषद् ने एक मध्यस्त के तौर पर अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभाई है |

3. आर्थिक व सामाजिक परिषद् (Economic And Social Council) (ECOSOC)

सुरक्षा परिषद् का मुख्य कार्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाये रखना है परन्तु जबतक किसी देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति ठीक व मजबूत न हो तब तक किसी भी राज्य व देश में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा शांति मजबूत नहीं होगी | सयुक्त राष्ट्र का मुख्य उदेश्य किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदत करना है | सयुक्त राष्ट्र किसी देश के सांस्कृतिक विकास, महिला सुरक्षा, महिला शशक्तिकरण, रोजगार उत्पादन व अल्पसंख्यक समुदाए के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है |

सयुक्त राष्ट्र के इन उद्देश्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी आर्थिक एवम सामाजिक परिषद् की है | इसमें कुल 54 सदस्य है | इनके सदस्यों का चुनाव महासभा करती है | इसके एक तिहाई सदस्य हर साल बदलते रहते है | हर एक सदस्य के पास एक वोट होता है | इसके अध्यक्ष का चुनाव सदस्य देश आपस में मिलकर करते है |

रामा स्वामी मुदालियर इसके प्रथम आध्यक्ष थे | इसका जिक्र सयुक्त राष्ट्र के अनुछेद 55 में किया गया है | जब सामाजिक और आर्थिक परिषद् का निर्माण हुआ उस समय कई और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाए मानवीय और सामाजिक मुद्दों पर कार्य कर रही थी | सयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद् ने ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के समन्वय का कार्य किया |

आर्थिक एवम सामाजिक परिषद् के तत्वाधान में कई महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संसथान कार्य करते है | इनमे निम्नलिखित महत्वपूर्ण है –

1. अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन (1914) (जेनेवा)

2.  विश्वबैंक (1944) (वाशिंगटन)

3. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (1944) (वाशिंगटन)

4. खाद्य एवम कृषि संगठन (1945) (रोम)

5. UNESCO

6. विश्व स्वाथ्य संघठन W.H.O (1946) (जेनेवा)

7. विश्व खगोलविद संगठन W.M.O (1950) (जेनेवा)

8. UNICEF

                                     

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योगी आदित्यनाथ आम इंसान से सन्यासी और मुख्यमंत्री तक का सफ़र

Uploaded Date: 18 March 2020

 

योगी आदित्यनाथ (मूल नाम : अजय सिंह बिष्ट; जन्म 5 जून 1972) गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महन्त तथा राजनेता हैं एवं वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री हैं। इन्होंने 19 मार्च 2017 को प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को की बड़ी जीत के बाद यहाँ के 21वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली| वे 1998 से 2017 तक भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया | और 2014 लोकसभा में भी यहीं से सांसद चुने गए थे। आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवयेद्यानाथ के उत्तराधिकारी हैं। ये हिन्दू युवाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह हिन्दू युवा वाहनी के संस्थापक भी हैं, तथा इनकी छवि कथित तौर पर एक देशभक्त की है|

प्रारंभिक जीवन 

5 जून 1972 को उत्तराखण्ड के पौड़ी गडवाल जिले स्थित यम्केस्वर तहसील के पंचुर गाँव के एक गढ़वाली राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ।इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट है जो एक फॉरेस्ट रेंजर थे, तथा इनकी मां का नाम सावित्री देवी है। अपनी माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़ी बहनों व एक बड़े भाई के बाद ये पांचवें थे एवं इनसे और दो छोटे भाई हैं|

इन्होंने 1977 में टिहरी के गजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की व 1987 में यहाँ से दसवीं की परीक्षा पास की। सन् 1989 में ऋषिकेश के श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए ये अखिल भारतीय विद्याथी परिषद् से जुड़े। 1992 में श्रीनगर  के हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्याल से इन्होंने गणित में बीएससी की परीक्षा पास की। कोटद्वार में रहने के दौरान इनके कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें इनके सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान स्नातकोत्तरकरने का इनका प्रयास असफल रह गया। इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में पुनः विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश तो लिया लेकिन राम मंदिर आंदोलन का प्रभाव और प्रवेश को लेकर परेशानी से उनका ध्यान अन्य ओर बंट गया।1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने ये गोरखपुर आए एवं गोरखपुर प्रवास के दौरान ही ये महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए थे जो इनके पड़ोस के गांव के निवासी और परिवार के पुराने परिचित थे। अंततः ये महंत की शरण में ही चले गए और दीक्षा ले ली। 1994 में ये पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया|

12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के निधन के बाद इन्हें यहाँ का महंत बनाया गया। 2 दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया|

रजनीतिक जीवन

सबसे पहले 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत गए। तब इनकी उम्र केवल 26 वर्ष थी। वे बारहवीं लोक सभा (1998-99) के सबसे युवा सांसद थे। 1999 में ये गोरखपुर से पुनः सांसद चुने गए।

अप्रैल 2002 में इन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी। 2004 में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता। 2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इन्हें एक हेलीकॉप्टर भी दिया गया|

19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री पद सौंपा गया|

 

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इथोपिया के पीएम अबी अहमद को शांति का नोबेल |

Uploaded Date: 13 October 2019

 

इथोपिया के पीएम अबी अहमद को साल 2019 के नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा जायेगा | नोबेल समिति ने शुक्रवार को यह घोषणा की | पड़ोसी देश इरिट्रिया से दो दशक पुराना सीमा विवाद सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए उन्हें ये सम्मान मिलेगा |

नोबेल शांति पुरस्कार जितने वाले 43 वर्षीय अबी अहमद किसी अफ़्रीकी देश के सबसे युवा राष्ट्राअध्यक्ष है | हिंसा प्रभावित अफ्रीका में शांति और सकारात्मकता की नयी लहर पैदा करने के लिए उन्हें इथोपिया का नेल्सन मंडेला कहा जाता है |

अप्रैल 2018 में गृहयुद्ध से जूझरहे इथोपिया की सत्ता सभालने के बाद से ही अहमद ने इरिट्रिया से सम्बन्ध सुधारने की कवायद तेज कर दी थी | जुलाई में इरिट्रिया की राजधानी असमारा में हुई इतिहासिक मुलाकात में उन्होंने अफ्वेकरी के साथ मिलकर दो दशक पुराना सीमा विवाद हल करने का ऐलान किया |

साल के अंत में दोनों देशो ने शांति समझोते पर मुहर लगाई | इसी के साथ इथोपिया और इरिट्रिया के बीच हवाई सेवा बहाल हो गयी | दोनों देशो में एक दुसरे के दूतावास दुबारा खुल गए | व्यापारिक संबंधो को भी जीवन मिला |

अहमद ने प्रधानमंत्री काल के पहले 100 दिनों में देश से एमरजेंसी हटाई | हजारो राजनितिक बंदियों को रिहा किया | जिन असंतुष्ट नेताओ और कार्यकर्ताओं को इथोपिया से निर्वासित किया गया था उन्हें स्वदेश लोटने की इजाजत दी| मीडिया पर लागू सेंसरशिप ख़त्म की | अहमद ने इथोपिया सर्कार में महिलाओ की भागीदारी को भी बढाया | उन्होंने मंत्रीमंडल में रक्षामंत्री सहित आधे पद महिलाओ को शोपे | सितम्बर 2018 में अहमद ने इरीट्रिया और जिबूती के बीच वर्षो से चली आ रही राजनितिक शत्रुता को ख़त्म कर कूटनीतिक रिश्तो को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई |

उन्होंने केन्या और सोमालिया में समुंद्री इलाके को लेकर चले आ रहे विवाद को ख़त्म करने में मध्यस्तता की | सूडान के सैन्य शासन और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह करवाने में निर्णायक भूमिका अदा की | अहमद अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आन्दोलन चलाने वाले मंडेला के बोहोत बड़े प्रसंसक है | 

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National Register Of Citizens Of India(NRC)

Uploaded Date: 02 September 2019

 

National Register Of Citizens Of India(NRC)

भारत की प्रथम जनगणना 1951 के बाद तत्काल प्रधानमंत्री राजीव गाँधी द्वारा NRC को मंजूरी दी गयी इसके तहत जो भी व्यक्ति 1971 के बाद देश में आया उसे वापस उसे अपने देश भेजा जायेगा |

असम भारत का पहला राज्य है जहा भारतीय राष्ट्रीय पंजीकरण है | बांग्लादेश विभाजन से पहले जो लोग भारत आये है केवल उन्हें ही भारत का नागरिक माना जायेगा | असम में लगभग 3.2 करोड़ लोगो ने आवेदन किये जिसमे केवल 1.9 करोड़ आवेदन ठीक पाए गये|

अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए सबसे पहले 1979 में आखिल असम छात्र संघ द्वारा आन्दोलन चलाया गया | यह आन्दोलन 6 वर्षो तक चला | 15 अगस्त 1985 को असम समझोते पर हस्ताक्षर के साथ ये आन्दोलन समाप्त हुआ|

कब क्या हुआ

1950 : बटवारे के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या मई शरणार्थियो के आने के बाद प्रवासी {असम से निष्काशन} अधिनियम कानून लागू किया गया |

1951 : स्वतन्त्र भारत की पहली जनगणना हुई | इसके आधार पर पहला एनआरसी तैयार किया गया |

1957 : प्रवासी {असम से कानून निष्कासन } कानून निरस्त किया गया

1964 – 1965 : पूर्वी पाकिस्तान मे दंगो और युद्ध के कारण फिर से बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आए और स्वतंत्र बंगलादेश अस्तित्व में आया |

1971 : पूर्वी पाकिस्तान में दंगो और युद्ध के कारण फिर से बड़ी संख्या मे शरणार्थी आए | स्वतंत्र बांग्लादेश अस्तित्व में आया |

1979 -1985 : विदेशियों की पहचान कर उनके निर्वासन के लिए असम से छह साल आन्दोलन चला जिसका नेतृत्व अखिल असम छात्र संघ {आसू } ने किया |

1983 : मध्य असम के नेल्ली में नरसंहार हुआ जिसमे 3000 लोंगो की मौत हो गई | अवैध प्रवासी { न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित} अधिनियम पारित किया गया| 

1985 : तत्कालीन पीएम राजीव गाँधी की मोजूदगी में केंद्र – राज्य सरकार के बीच असम समझोते पर हस्ताक्षर | कहा गया 25 मार्च 1971 को या उसके बाद आए विदेशियो को निष्कासित किया जायेगा |

1997 : निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओ के नाम के आगे डीन { संदेहास्पद } जोड़ना का फैसला किया जिनके भारतीय नागरिक होने पर शक था |

2005 : उच्चतम न्यायालय ने अवैध प्रवासी पहचान त्र्टीब्यूनल {आईएमडीटी } कानून को घोषित किया |

2009 : गैर सरकारी संगठन असम पुब्लिक वर्क्स ने मतदाता सूचि से विदेसियों के नाम हटाये जाने और एनआरसी के अधतन की अपील की |

2010 : एनआरसी के अधतन के लिए चाय गाव बारपेटा में प्रायोगिक परियोजना शुरु हुई | बारपेटा में हिंसा में चार लोंगो की मौत हुई | परियोजना बंद कर दी गई|

2013 : उच्चतम न्यायलय ने एपीडब्लू की याचिका की सुनवाई की | केंद्र राज्य को एनआरसी के अधतन की प्रकिर्या आरम्भ करने का आदेश दिया

2015 : एनआरसी अधतन की प्रकिया शुरू की गई |

2017 : 31 दिसम्बर को मसौदा एनआरसी प्रकाशित हुआ जिसमे 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ के नाम प्रकाशित किये गए |

30 जुलाई 2018 : एनआरसी की एक मसौदा सूची जारी की गई | इसमें 2.9 करोड़ लोंगो में से 40 लाख के नाम शामिल नही किये गये |

26 जून 2019 : 1,02,462 लोंगो की अतरिक्त मसौदा निष्कासन सूची प्रकाशित | और 31 अगस्त को अंतिम एनआरसी सूची जारी की गई |

 

 

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अरुण जेटली (28 दिसम्बर 1952 जन्म – 24 अगस्त 2019 मृत्यु)

Uploaded Date: 25 August 2019

 

अस्त हो गया अरुण

अरुण जेटली (28 दिसम्बर 1952 जन्म – 24 अगस्त 2019 मृत्यु)

व्यक्तिगत जीवन :

 अरुण जेटली जी का जन्म दिल्ली मे हुआ था | इनके पिता का नाम महाराज किशन जेटली और माता का नाम प्रभा जेटली था | इनके पिता एक वकील थे | इनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के सेंट जेविर्स स्कूल से हुई | इन्होने श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से स्नातक की परीक्षा पास की | 1977 मे इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री प्राप्त की | 1974 मे वे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष बने |

उनका विवाह 24 मई 1982 को संगीता जेटली जी के साथ हुआ | उनके दो बच्चे पुत्र रोहन व पुत्री सोनाली है |

राजनीतिक जीवन :

अरुण जेटली जी को 1991 मे बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारणी का सदस्य चुना गया | 1999 के आम चुनाव से पहले ही उन्हें बीजेपी का प्रवक्ता बना दिया गया |

1999 मे बीजेपी की वाजपेयी सरकार मे सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री नुक्त किया गया | 3 जून 2009 को उन्हें आडवाणी जी द्वारा राज्य सभा मे विपक्ष का नेता चुना गया | 2014 के लोकसभा चुनाव मे वह अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन वह हार गये |

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार मे उन्हें वित मंत्री के रूप मे चुना गया | उन्ही के कार्यकाल मे 9 नवम्बर 2016 को भ्रष्टाचार, काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए 500 और 1000 के नोटों का विमुद्रीकरण किया |

वित्त मंत्री के रूप मे अरुण जेटली के द्वारा लिए गये कुछ कड़े और महत्वपूर्ण फैसले :

1. नोट्बंदी : 9 नवम्बर 2016 को भ्रष्टाचार, काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए 500 और 1000 के नोटों का विमुद्रीकरण किया |

2. वस्तु एवं सेवाकर (GST) :

1 जुलाई 2017 की आधी रात को पुरे देश मे GST लागु किया गया | इस दिन से पुरे देश मे 17 अलग अलग टेक्स को खत्म कर के ONE NATION ONE TAX की परम्परा को शुरू किया गया|

3. दिवालिया कानून : 28 मई 2016 को लोग सभा और राज्य सभा द्वारा यह कानून पारित किया गया | इस बिल के लागू होने के बाद बैंक और अन्य लेनदारो को दिवालिया कंपनी से वशुली मे मदद मिल रही है |

4. मुद्रा योजना : केंद्र सरकार ने छोटे उद्धम सुरु करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अप्रेल 2015 मे सुरु की थी |

5. NPA की सफाई : मोदी सरकार के पहले कार्यकाल मे बतौर वित्त मंत्री जेटली ने फसे कर्ज की बढती समस्या से निपटने मे बहुत हद तक कामयाबी हासिल की |

6. विनिवेश का फैसला : जेटली के काम का नतीजा था की वाजपेयी ने 2001 मे अलग से विनिवेश मंत्रालय का गठन किया |

7. बैंको का एकीकरण : भारतीय बैंको को वैश्विक बैंको जैसा बनाने के लिए सरकारी बैंको का एकीकरण का काम अरुण जेटली की अगुवाई में ही शुरू किया गया |

8. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश : प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के जरिए देश मे निवेश बढ़ाने मे मुख्य भूमिका निभाई |

9. मोनीटरी पालिसी कमिटी : मोद्रिक नीति बनाने मे पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उदेश्य से 2016 मे मोनीटरी पालिसी कमिटी का गठन जेटली द्वारा किया गया |

10. महंगाई पर नियंत्रण : मोदी सरकार के पहले कार्यकाल मे बतौर वित्त मंत्री जेटली ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये | 2014 मे राज्यकोषीय घाटा 4.5% था जो अप्रैल 2019 में घटकर 3.5% पर आ गया | इसी तरह 2014 में खुदरा महगाई 9.5% था जो 2019 में 2.95% दर्ज किया गया |

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया.

Uploaded Date: 16 August 2019

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया.

सफेद कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा तथा तीन रंगों वाला साफा पहने मोदी जब समारोह स्थल पर पहुंचे तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनका स्वागत किया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने सलामी गारद का निरीक्षण किया. लाल किले पर पहुंचने से पहले मोदी राजघाट गए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देशव़ासियों को स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की बधाई दी. उन्होंने देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं. पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान किसानों, प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों, डॉक्टरों, मुस्लिम महिलाओं समेत कई मुख्य बिंदुओं का जिक्र किया.

पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

मेरे प्यारे देशवासियों, स्वतंत्रता दिवस के इस पवित्र दिवस पर सभी देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं. आज रक्षाबंधन का भी पर्व है. सदियों से चली आ रही परंपरा भाई-बहन के प्यार को अभिव्यक्त करती है. मैं सभी देशवासियों और भाई बहनों को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अनेक-अनेक शुभकामना देता हूं.

आज जब देश आजादी का पर्व मना रहा है उसी समय देश के अनेक भागों में अति वर्षा, बाढ़ के कारण लोग कठिनाइयों से जूझ रहे हैं. कई लोगों ने अपने स्वजन खोये हैं, मैं उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं|

देश आजाद होने के बाद से इतने वर्षों में देश की शांति और सुरक्षा के लिए अनेक लोगों ने अपना योगदान दिया है. आज मैं उन सबको भी नमन करता हूं. नयी सरकार को 10 हफ्ते भी नहीं हुए हैं, लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में सभी क्षेत्रों में हर प्रयास को बल दिए गए हैं, हम पूरे समर्पण के साथ सेवारत हैं.

अगर 2014 से 2019 आवश्यकताओं की पूरी का दौर था तो 2019 के बाद का कालखंड देशवासियों की आकांक्षाओं की पूर्ति का कालखंड है, उनके सपनों को पूरा करने का कालखंड है.

किसानों और छोटे व्यापारियों को 60 वर्ष की आयु के बाद आर्थिक सहारा देने के लिए पेंशन का प्रावधान किया गया है. जल संकट से निपटने के लिए, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर योजनाएं बनाएं, इसके लिए एक अलग जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है.

‘सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र लेकर हम चले थे लेकिन 5 साल में ही देशवासियों ने ‘सबका विश्वास' के रंग से पूरे माहौल को रंग दिया.

समस्यों का जब समाधान होता है तो स्वावलंबन का भाव पैदा होता है, समाधान से स्वालंबन की ओर गति बढ़ती है. जब स्वावलंबन होता है तो अपने आप स्वाभिमान उजागर होता है और स्वाभिमान का सामर्थ्य बहुत होता है.

मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया, आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन किया गया.

पांच साल पहले लोग हमेशा सोचते थे कि ‘क्या देश बदलेगा' या ‘क्या बदलाव हो सकता है'? अब लोग कहते हैं कि- हां, मेरा देश बदल सकता है.

अनुच्छेद 370 को खत्म करके सरदार पटेल के सपने को पूरा किया. 370 पर हर दल के लोगों का समर्थन मिला. 370 की वकालत करने वालों से देश सवाल पूछ रहा है. 370 जरूरी था तो स्थाई क्यों नहीं किया गया?

15 अगस्त पर महत्वपूर्ण निबंध 

हमारे सभी त्योहारों में 15 अगस्त अर्थात स्वतंत्रता दिवस सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है| स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार सभी त्योहारों में सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्यौहार है.

इस दिन सभी जाति धर्म के लोग आपस में बिना किसी भेदभाव के यह त्यौहार मनाते है| सब में देशभक्ति की भावना जगती है, स्कूल में फंक्शन होता है, बच्चे इस त्यौहार के ऊपर निबंध लिखते है.

पर जो छात्र स्वतंत्रता दिवस पर निबंध नही लिख पाते वो इस लेख के जरिये अपना निबंध लिख सकते है| इस लेख में हम 6 निबंध लिखेंगे जिसको आप कॉपी करके अपने स्कूल में दिखा सकते हो.

तो आईये प्यारें छात्रों, आपका ज्यादा समय न लेते हुए 15 अगस्त पर छोटा निबंध को पढ़ना शुरू करते हैं |

भारत देश अन्य देशों से अलग है| 15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हुआ था जिसकी ख़ुशी में हर साल भारत के लोग इस त्यौहार को बड़ी ही धूम धाम के साथ मनाते हैं.

स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर झंडा फहराया जाता है और लाखों लोगों की भीड़ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होती है.

लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा भाषण दिया जाता है और तीनों भारतीय सेनाओं द्वारा अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाता है| साथ ही कई सारे रंगारंग कार्यक्रम प्रदर्शित होते हैं जैसे-भारत के राज्यों द्वारा झाकिंयों के माध्यम से अपनी कला और संस्कति की प्रस्तुति, स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन करना आदि.

15 अगस्त पर भारत के उन सभी महान हस्तियों को याद करते है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्णं योगदान दिया और यह उत्सव देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है |

भारत देश सभी देशों से अलग है| भारत में विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाये जाते हैं| आज भारत में सभी जाती धर्म के लोग आजादी के साथ जीते हैं| भारत में आजादी के बाद जाति भेदभाव करीब करीब खत्म ही हो गया है अब चारों तरफ एक समानता नजर आती है.

15 अगस्त 1947, भारत की आजादी का दिन है इस खास दिन को एक उत्सव की तरह हर साल भारत में स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है.

इस कार्यक्रम को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर झंडा फहराया जाता है तथा लाखों लोगों की भीड़ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होती है.

लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा भाषण दिया जाता है और तीनों भारतीय सेनाओं द्वारा अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाता है साथ ही कई सारे रंगारंग कार्यक्रम प्रदर्शित होते हैं जैसे-भारत के राज्यों द्वारा झाकिंयों के माध्यम से अपनी कला और संस्कति की प्रस्तुति, स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन करना आदि।

15 अगस्त पर हम भारत के उन सभी महान हस्तियों को याद करते है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्णं योगदान दिया। साथ ही यह उत्सव देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य स्थलों पर भी पूरे हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है.

भारतीय स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है| इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है ये दिन भारतीय लोगों को ब्रिटिश शासन से अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हुए युद्ध को याद दिलाता है.

भारत की आजादी ढ़ेरों आंदोलनों और सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों की आहुतियों से ही प्राप्त हुई है। आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया.

स्वतंत्रता दिवस दिन को शिक्षक, विद्यार्थी, अभिवाहक और सभी लोग ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान कर मनाते हैं| भारतीय ध्वज तिरंगा प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर फहराया जाता है.

राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी के साथ उस पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर सम्मान दिया जाता है.

हमारे तिरंगे झंडे में केसरिया हिम्मत और बलिदान को, सफेद रंग शांति और सच्चाई को तो वहीं हरा रंग विश्वास और शौर्य को प्रदर्शित करता है.

भारतीय तिरंगे के मध्य एक अशोक चक्र होता है जिसमें 24 तिलियाँ होती है। इस खास दिन पर हम भगत सिंह जी, सुखदेब जी, राजगुरु जी गांधीजी जैसे उन साहसी पुरुषों के महान बलिदानों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अविस्मरणीय योगदानों के लिये याद करते है.

स्कूलों में कॉलेजों और अन्य मुख्य स्थानों पर विद्यार्थी द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों पर व्याख्यान दिया जाता हैं तथा परेड में भाग लिया जाता हैं.

इस खास अवसर को सभी अपनी-अपनी तरह मनाते है, कोई देशभक्ति की फिल्में देखते है तो कोई अपने परिवार और मित्रों के साथ बाहर घूमने जाता है तो कोई पतंगे उड़ाते हैं.

15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हुआ था| भारतीय स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 पर ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

15 अगस्त का त्यौहार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने तौर तरीकों से मनाया जाता है कोई मित्रों और परिवारों के साथ इस दिन को यादगार बनाता है तो कोई देशभक्ति गानों और फिल्मों को देख झूमता है, रंग बिरंगे पतंगे उडाते हैं.

इस दिन कई लोग कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर तथा विभिन्न माध्यमों के द्वारा स्वतंत्रता दिवस के महत्व को प्रचारित-प्रसारित करते है.

15 अगस्त 1947, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प० जवाहर लाल नेहरू जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर भारतीय झंडा फहराने की प्रथा शुरू की।

इसी प्रथा को आने वाले दूसरे प्रधानमंत्रीयों ने भी आगे बरकरार रखा है| जहां ध्वजारोहण, परेड, तथा सांस्कृतिक कार्यकर्मो आदि से हर साल इसी दिन आयोजित होते है। भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर लोग अपने-अपने वस्त्रों पर, घर तथा वाहनों पर झंडा लगा कर मनाते है.

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को अपने भाषण “’ट्रिस्ट वीद डेस्टिनी”, के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा की थी साथ ही उन्होंने अपने भाषण में कहा कि, वर्षों की गुलामी के बाद ये वो समय है जब हम अपना संकल्प निभाएंगे और अपने दुर्भाग्य का अंत करेंगे.

भारत ही मात्र एक ऐसा देश है जहां करोड़ों लोग विभिन्न धर्म, परंपरा और संस्कृति के होते हुए भी एक साथ रहते है और स्वतंत्रता दिवस के इस उत्सव को पूरी खुशी के साथ मनाते हैं.

इस दिन, भारतीय होने के नाते, हमें गर्व होता है और हम भारतियों को ये वादा करना चाहिये कि हम किसी भी प्रकार के आक्रमण या अपमान से अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिये सदा देशभक्ति से पूर्णं और ईंमानदार रहेंगे.

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था| भारतीय स्वतंत्रता दिवस15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

भारत में स्वतंत्रता दिवस, ‘ब्रिटिश शासन से आजाद होने की ख़ुशी में’ सभी भारतीयों के लिये एक महत्वपूर्णं दिन है। 15 अगस्त 1947 से स्वतंत्रता दिवस हर साल मनाया है.

गांधीजी, भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय जी, तिलक जी और चन्द्रशेखर आजाद जी जैसे और अन्य हजारों देशभक्तों की कुर्बानीयों से स्वतंत्र हुआ भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में है.

15 अगस्त को भारतीय अपने घरों को सजाते हैं, फिल्में देखते हैं, अपने घरों पर राष्ट्रीय झंडे को लगा कर, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत गाकर, रंग बिरंगी पतंगे उड़ाते हैं.

बच्चे तो रात को ही पतंगे तैयार कर लेते हैं और सुबह जल्दी उठ कर पतंग उड़ाने की ख़ुशी को मनाते हैं और भारतीय कई तरह से अपने स्वतंत्रता दिवस को मनाते हैं। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिये भारतीय सेनाओं द्वारा परेड, विभिन्न राज्यों की झांकियों की प्रस्तुति और राष्ट्रगान की धुन के साथ पूरा वातावरण में देशभक्ति का जोश जगा देते है.

अन्य सभी राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस को इसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसमें राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथी के तौर पर होते है.

घर के बड़े लोग तो सुबह जल्दी ही तैयार होकर प्रधानमंत्री के भाषण का इंतजार करते है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास से प्रभावित लोग 15 अगस्त को देशभक्ति फिल्में देखते है और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं.

भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय, प० जवाहर लाल नेहरू जी, महात्मा गांधी जी जैस लोगों की वजह से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को खूब मदद मिली और 200 साल के लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी मिली.

स्वतंत्रता के लिये हर भारतीय एक जुट हो गए, चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग, जाति, संस्कृति या परंपरा को मानने वाले हो।

यहां तक कि अरुणा आसिफ अली, एनी बेसेंट, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडु और विजय लक्ष्मी पंडित जैसी महिलाओं ने भी चुल्हा-चौका छोड़कर आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्णं भूमिका अदा की थी.

हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

भारत में स्वतंत्रता दिवस, ‘ब्रिटिश शासन से आजाद होने की ख़ुशी में’ सभी भारतीयों के लिये एक महत्वपूर्णं दिन है। 15 अगस्त 1947 से स्वतंत्रता दिवस हर साल मनाया है.

गांधीजी, भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय जी, तिलक जी और चन्द्रशेखर आजाद जी जैसे और अन्य हजारों देशभक्तों की कुर्बानीयों से स्वतंत्र हुआ भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में है और तो और भारतीय स्वतंत्रता दिवस कि कहानी बहुत बड़ी है न जाने कितने लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता दिवस के लिए अपनी जान दी शहीद हुए और हमें आज एक स्वतंत्र देश दिया खुद तो मौत को गले लगाया और हमें एक आजाद देश अनमोल तोहफे के रूप में दिया है.

आज भी उन शहीदों कि याद में आँखों से आंसू आ जाते है जिन्होंने भारत कि आजादी के लिए अपनी जान दी थी| महात्मा गाँधी जी के नेतृत्व में जब भारतीय स्वतंत्रता युद्ध में लोगों ने बड़ी जिद्दो जहद के साथ बिना किसी हिंसक क्रिया के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया.

अब जब भारत आजाद हुआ है तो 15 अगस्त को भारतीय लोग अपने घरों को सजाते हैं, फिल्में देखते हैं, अपने घरों पर राष्ट्रीय झंडे को लगा कर, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत गाकर, रंग बिरंगी पतंगे उड़ाते हैं.

बच्चे तो रात को ही पतंगे तैयार कर लेते हैं और सुबह जल्दी उठ कर पतंग उड़ाने की ख़ुशी को मनाते हैं और भारतीय कई तरह से अपने स्वतंत्रता दिवस को मनाते हैं। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिये भारतीय सेनाओं द्वारा परेड, विभिन्न राज्यों की झांकियों की प्रस्तुति और राष्ट्रगान की धुन के साथ पूरे वातावरण में देशभक्ति का जोश जगा देते है.

अन्य सभी राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस को इसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसमें राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथी के तौर पर होते है.

घर के बड़े लोग तो सुबह जल्दी ही तैयार होकर प्रधानमंत्री के भाषण का इंतजार करते है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास से प्रभावित लोग 15 अगस्त को देशभक्ति फिल्में देखते है और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं.

भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय, प० जवाहर लाल नेहरू जी, महात्मा गांधी जी जैस लोगों की वजह से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को खूब मदद मिली और 200 साल के लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी मिली.

स्वतंत्रता के लिये हर भारतीय एक जुट हो गए, चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग, जाति, संस्कृति या परंपरा को मानने वाले हो। यहां तक कि अरुणा आसिफ अली, एनी बेसेंट, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडु और विजय लक्ष्मी पंडित जैसी महिलाओं ने भी चुल्हा-चौका छोड़कर आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्णं भूमिका अदा की थी.

हमारा भारत एक महान देश है जहां विभिन्न प्रकार के त्यौहार आदि मनाये जाते हैं हमारे भारत में सब एक समान है, हमारे भारत में कोई असमानता नहीं है अब और यहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब एक दुसरे के लिए मर मिटने को तैयार रहते हैं.

भारत की आजादी की कीमत सब जानते है, हमारा भारत महान तो था ही आज एक व्यापारी देश में भी तब्दील हो रहा है.

हम भारतीय हैं हमें इस बात पर गर्व है लेकिन हमारे भारत में कुछ लोग हैं जो इस आजादी की कद्र नहीं कर रहे है वे लोग उन लोगों की कुर्बानियों को भूल चुके हैं जिन्होंने अपनी जान गवां कर हमें आजादी दिलाई थी| वे हमेशा चाहते थे की हमारा भारत एक महान देश बने और हमारे भारत में एकता हमेशा बनी रहे लेकिन आज भी कहीं न कहीं धर्म जाति उंच नीच को लेकर वाद विवाद बने रहते हैं.

आप से इतना निवेदन है की आप न लड़ाई झगड़े करें और न ही करने दे| अमन चैन से जियें और जीने दे आजाद रहे और आजादी से सब को जीने दें| संविधान कानून का पालन करें और किसी अन्य को इसका उल्लंघन न करने दें आप से ही एक अच्छे भारत का निर्माण होना है “जय हिन्द जय भारत“

 

 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया.

Uploaded Date: 16 August 2019

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया.

सफेद कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा तथा तीन रंगों वाला साफा पहने मोदी जब समारोह स्थल पर पहुंचे तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनका स्वागत किया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने सलामी गारद का निरीक्षण किया. लाल किले पर पहुंचने से पहले मोदी राजघाट गए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देशव़ासियों को स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की बधाई दी. उन्होंने देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं. पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान किसानों, प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों, डॉक्टरों, मुस्लिम महिलाओं समेत कई मुख्य बिंदुओं का जिक्र किया.

पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

मेरे प्यारे देशवासियों, स्वतंत्रता दिवस के इस पवित्र दिवस पर सभी देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं. आज रक्षाबंधन का भी पर्व है. सदियों से चली आ रही परंपरा भाई-बहन के प्यार को अभिव्यक्त करती है. मैं सभी देशवासियों और भाई बहनों को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अनेक-अनेक शुभकामना देता हूं.

आज जब देश आजादी का पर्व मना रहा है उसी समय देश के अनेक भागों में अति वर्षा, बाढ़ के कारण लोग कठिनाइयों से जूझ रहे हैं. कई लोगों ने अपने स्वजन खोये हैं, मैं उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं.

देश आजाद होने के बाद से इतने वर्षों में देश की शांति और सुरक्षा के लिए अनेक लोगों ने अपना योगदान दिया है. आज मैं उन सबको भी नमन करता हूं. नयी सरकार को 10 हफ्ते भी नहीं हुए हैं, लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में सभी क्षेत्रों में हर प्रयास को बल दिए गए हैं, हम पूरे समर्पण के साथ सेवारत हैं.

अगर 2014 से 2019 आवश्यकताओं की पूरी का दौर था तो 2019 के बाद का कालखंड देशवासियों की आकांक्षाओं की पूर्ति का कालखंड है, उनके सपनों को पूरा करने का कालखंड है.

किसानों और छोटे व्यापारियों को 60 वर्ष की आयु के बाद आर्थिक सहारा देने के लिए पेंशन का प्रावधान किया गया है. जल संकट से निपटने के लिए, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर योजनाएं बनाएं, इसके लिए एक अलग जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है.

‘सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र लेकर हम चले थे लेकिन 5 साल में ही देशवासियों ने ‘सबका विश्वास' के रंग से पूरे माहौल को रंग दिया.

समस्यों का जब समाधान होता है तो स्वावलंबन का भाव पैदा होता है, समाधान से स्वालंबन की ओर गति बढ़ती है. जब स्वावलंबन होता है तो अपने आप स्वाभिमान उजागर होता है और स्वाभिमान का सामर्थ्य बहुत होता है.

मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया, आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन किया गया.

पांच साल पहले लोग हमेशा सोचते थे कि ‘क्या देश बदलेगा' या ‘क्या बदलाव हो सकता है'? अब लोग कहते हैं कि- हां, मेरा देश बदल सकता है.

अनुच्छेद 370 को खत्म करके सरदार पटेल के सपने को पूरा किया. 370 पर हर दल के लोगों का समर्थन मिला. 370 की वकालत करने वालों से देश सवाल पूछ रहा है. 370 जरूरी था तो स्थाई क्यों नहीं किया गया?

15 अगस्त पर महत्वपूर्ण निबंध 

हमारे सभी त्योहारों में 15 अगस्त अर्थात स्वतंत्रता दिवस सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है| स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार सभी त्योहारों में सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्यौहार है.

इस दिन सभी जाति धर्म के लोग आपस में बिना किसी भेदभाव के यह त्यौहार मनाते है| सब में देशभक्ति की भावना जगती है, स्कूल में फंक्शन होता है, बच्चे इस त्यौहार के ऊपर निबंध लिखते है.

पर जो छात्र स्वतंत्रता दिवस पर निबंध नही लिख पाते वो इस लेख के जरिये अपना निबंध लिख सकते है| इस लेख में हम 6 निबंध लिखेंगे जिसको आप कॉपी करके अपने स्कूल में दिखा सकते हो.

तो आईये प्यारें छात्रों, आपका ज्यादा समय न लेते हुए 15 अगस्त पर छोटा निबंध को पढ़ना शुरू करते हैं |

भारत देश अन्य देशों से अलग है| 15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हुआ था जिसकी ख़ुशी में हर साल भारत के लोग इस त्यौहार को बड़ी ही धूम धाम के साथ मनाते हैं.

स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर झंडा फहराया जाता है और लाखों लोगों की भीड़ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होती है.

लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा भाषण दिया जाता है और तीनों भारतीय सेनाओं द्वारा अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाता है| साथ ही कई सारे रंगारंग कार्यक्रम प्रदर्शित होते हैं जैसे-भारत के राज्यों द्वारा झाकिंयों के माध्यम से अपनी कला और संस्कति की प्रस्तुति, स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन करना आदि.

15 अगस्त पर भारत के उन सभी महान हस्तियों को याद करते है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्णं योगदान दिया और यह उत्सव देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है |

भारत देश सभी देशों से अलग है| भारत में विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाये जाते हैं| आज भारत में सभी जाती धर्म के लोग आजादी के साथ जीते हैं| भारत में आजादी के बाद जाति भेदभाव करीब करीब खत्म ही हो गया है अब चारों तरफ एक समानता नजर आती है.

15 अगस्त 1947, भारत की आजादी का दिन है इस खास दिन को एक उत्सव की तरह हर साल भारत में स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है.

इस कार्यक्रम को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर झंडा फहराया जाता है तथा लाखों लोगों की भीड़ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होती है.

लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा भाषण दिया जाता है और तीनों भारतीय सेनाओं द्वारा अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाता है साथ ही कई सारे रंगारंग कार्यक्रम प्रदर्शित होते हैं जैसे-भारत के राज्यों द्वारा झाकिंयों के माध्यम से अपनी कला और संस्कति की प्रस्तुति, स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन करना आदि।

15 अगस्त पर हम भारत के उन सभी महान हस्तियों को याद करते है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्णं योगदान दिया। साथ ही यह उत्सव देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य स्थलों पर भी पूरे हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है.

भारतीय स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है| इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है ये दिन भारतीय लोगों को ब्रिटिश शासन से अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हुए युद्ध को याद दिलाता है.

भारत की आजादी ढ़ेरों आंदोलनों और सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों की आहुतियों से ही प्राप्त हुई है। आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया.

स्वतंत्रता दिवस दिन को शिक्षक, विद्यार्थी, अभिवाहक और सभी लोग ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान कर मनाते हैं| भारतीय ध्वज तिरंगा प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर फहराया जाता है.

राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी के साथ उस पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर सम्मान दिया जाता है.

हमारे तिरंगे झंडे में केसरिया हिम्मत और बलिदान को, सफेद रंग शांति और सच्चाई को तो वहीं हरा रंग विश्वास और शौर्य को प्रदर्शित करता है.

भारतीय तिरंगे के मध्य एक अशोक चक्र होता है जिसमें 24 तिलियाँ होती है। इस खास दिन पर हम भगत सिंह जी, सुखदेब जी, राजगुरु जी गांधीजी जैसे उन साहसी पुरुषों के महान बलिदानों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अविस्मरणीय योगदानों के लिये याद करते है.

स्कूलों में कॉलेजों और अन्य मुख्य स्थानों पर विद्यार्थी द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों पर व्याख्यान दिया जाता हैं तथा परेड में भाग लिया जाता हैं.

इस खास अवसर को सभी अपनी-अपनी तरह मनाते है, कोई देशभक्ति की फिल्में देखते है तो कोई अपने परिवार और मित्रों के साथ बाहर घूमने जाता है तो कोई पतंगे उड़ाते हैं.

15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हुआ था| भारतीय स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 पर ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

15 अगस्त का त्यौहार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने तौर तरीकों से मनाया जाता है कोई मित्रों और परिवारों के साथ इस दिन को यादगार बनाता है तो कोई देशभक्ति गानों और फिल्मों को देख झूमता है, रंग बिरंगे पतंगे उडाते हैं.

इस दिन कई लोग कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर तथा विभिन्न माध्यमों के द्वारा स्वतंत्रता दिवस के महत्व को प्रचारित-प्रसारित करते है.

15 अगस्त 1947, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प० जवाहर लाल नेहरू जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर भारतीय झंडा फहराने की प्रथा शुरू की।

इसी प्रथा को आने वाले दूसरे प्रधानमंत्रीयों ने भी आगे बरकरार रखा है| जहां ध्वजारोहण, परेड, तथा सांस्कृतिक कार्यकर्मो आदि से हर साल इसी दिन आयोजित होते है। भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर लोग अपने-अपने वस्त्रों पर, घर तथा वाहनों पर झंडा लगा कर मनाते है.

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को अपने भाषण “’ट्रिस्ट वीद डेस्टिनी”, के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा की थी साथ ही उन्होंने अपने भाषण में कहा कि, वर्षों की गुलामी के बाद ये वो समय है जब हम अपना संकल्प निभाएंगे और अपने दुर्भाग्य का अंत करेंगे.

भारत ही मात्र एक ऐसा देश है जहां करोड़ों लोग विभिन्न धर्म, परंपरा और संस्कृति के होते हुए भी एक साथ रहते है और स्वतंत्रता दिवस के इस उत्सव को पूरी खुशी के साथ मनाते हैं.

इस दिन, भारतीय होने के नाते, हमें गर्व होता है और हम भारतियों को ये वादा करना चाहिये कि हम किसी भी प्रकार के आक्रमण या अपमान से अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिये सदा देशभक्ति से पूर्णं और ईंमानदार रहेंगे.

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था| भारतीय स्वतंत्रता दिवस15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

भारत में स्वतंत्रता दिवस, ‘ब्रिटिश शासन से आजाद होने की ख़ुशी में’ सभी भारतीयों के लिये एक महत्वपूर्णं दिन है। 15 अगस्त 1947 से स्वतंत्रता दिवस हर साल मनाया है.

गांधीजी, भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय जी, तिलक जी और चन्द्रशेखर आजाद जी जैसे और अन्य हजारों देशभक्तों की कुर्बानीयों से स्वतंत्र हुआ भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में है.

15 अगस्त को भारतीय अपने घरों को सजाते हैं, फिल्में देखते हैं, अपने घरों पर राष्ट्रीय झंडे को लगा कर, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत गाकर, रंग बिरंगी पतंगे उड़ाते हैं.

बच्चे तो रात को ही पतंगे तैयार कर लेते हैं और सुबह जल्दी उठ कर पतंग उड़ाने की ख़ुशी को मनाते हैं और भारतीय कई तरह से अपने स्वतंत्रता दिवस को मनाते हैं। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिये भारतीय सेनाओं द्वारा परेड, विभिन्न राज्यों की झांकियों की प्रस्तुति और राष्ट्रगान की धुन के साथ पूरा वातावरण में देशभक्ति का जोश जगा देते है.

अन्य सभी राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस को इसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसमें राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथी के तौर पर होते है.

घर के बड़े लोग तो सुबह जल्दी ही तैयार होकर प्रधानमंत्री के भाषण का इंतजार करते है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास से प्रभावित लोग 15 अगस्त को देशभक्ति फिल्में देखते है और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं.

भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय, प० जवाहर लाल नेहरू जी, महात्मा गांधी जी जैस लोगों की वजह से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को खूब मदद मिली और 200 साल के लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी मिली.

स्वतंत्रता के लिये हर भारतीय एक जुट हो गए, चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग, जाति, संस्कृति या परंपरा को मानने वाले हो।

यहां तक कि अरुणा आसिफ अली, एनी बेसेंट, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडु और विजय लक्ष्मी पंडित जैसी महिलाओं ने भी चुल्हा-चौका छोड़कर आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्णं भूमिका अदा की थी.

हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को प्राप्त करने की याद में हर साल भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय अवकाश होता है इस दिन, भारत के उन महान हस्तियों को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये हैं.

भारत में स्वतंत्रता दिवस, ‘ब्रिटिश शासन से आजाद होने की ख़ुशी में’ सभी भारतीयों के लिये एक महत्वपूर्णं दिन है। 15 अगस्त 1947 से स्वतंत्रता दिवस हर साल मनाया है.

गांधीजी, भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय जी, तिलक जी और चन्द्रशेखर आजाद जी जैसे और अन्य हजारों देशभक्तों की कुर्बानीयों से स्वतंत्र हुआ भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में है और तो और भारतीय स्वतंत्रता दिवस कि कहानी बहुत बड़ी है न जाने कितने लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता दिवस के लिए अपनी जान दी शहीद हुए और हमें आज एक स्वतंत्र देश दिया खुद तो मौत को गले लगाया और हमें एक आजाद देश अनमोल तोहफे के रूप में दिया है.

आज भी उन शहीदों कि याद में आँखों से आंसू आ जाते है जिन्होंने भारत कि आजादी के लिए अपनी जान दी थी| महात्मा गाँधी जी के नेतृत्व में जब भारतीय स्वतंत्रता युद्ध में लोगों ने बड़ी जिद्दो जहद के साथ बिना किसी हिंसक क्रिया के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया.

अब जब भारत आजाद हुआ है तो 15 अगस्त को भारतीय लोग अपने घरों को सजाते हैं, फिल्में देखते हैं, अपने घरों पर राष्ट्रीय झंडे को लगा कर, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत गाकर, रंग बिरंगी पतंगे उड़ाते हैं.

बच्चे तो रात को ही पतंगे तैयार कर लेते हैं और सुबह जल्दी उठ कर पतंग उड़ाने की ख़ुशी को मनाते हैं और भारतीय कई तरह से अपने स्वतंत्रता दिवस को मनाते हैं। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

स्वतंत्रता दिवस को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिये भारतीय सेनाओं द्वारा परेड, विभिन्न राज्यों की झांकियों की प्रस्तुति और राष्ट्रगान की धुन के साथ पूरे वातावरण में देशभक्ति का जोश जगा देते है.

अन्य सभी राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस को इसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसमें राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथी के तौर पर होते है.

घर के बड़े लोग तो सुबह जल्दी ही तैयार होकर प्रधानमंत्री के भाषण का इंतजार करते है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास से प्रभावित लोग 15 अगस्त को देशभक्ति फिल्में देखते है और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं.

भगत सिंह जी, लाला लाजपत राय, प० जवाहर लाल नेहरू जी, महात्मा गांधी जी जैस लोगों की वजह से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को खूब मदद मिली और 200 साल के लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी मिली.

स्वतंत्रता के लिये हर भारतीय एक जुट हो गए, चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग, जाति, संस्कृति या परंपरा को मानने वाले हो। यहां तक कि अरुणा आसिफ अली, एनी बेसेंट, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडु और विजय लक्ष्मी पंडित जैसी महिलाओं ने भी चुल्हा-चौका छोड़कर आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्णं भूमिका अदा की थी.

हमारा भारत एक महान देश है जहां विभिन्न प्रकार के त्यौहार आदि मनाये जाते हैं हमारे भारत में सब एक समान है, हमारे भारत में कोई असमानता नहीं है अब और यहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब एक दुसरे के लिए मर मिटने को तैयार रहते हैं.

भारत की आजादी की कीमत सब जानते है, हमारा भारत महान तो था ही आज एक व्यापारी देश में भी तब्दील हो रहा है.

हम भारतीय हैं हमें इस बात पर गर्व है लेकिन हमारे भारत में कुछ लोग हैं जो इस आजादी की कद्र नहीं कर रहे है वे लोग उन लोगों की कुर्बानियों को भूल चुके हैं जिन्होंने अपनी जान गवां कर हमें आजादी दिलाई थी| वे हमेशा चाहते थे की हमारा भारत एक महान देश बने और हमारे भारत में एकता हमेशा बनी रहे लेकिन आज भी कहीं न कहीं धर्म जाति उंच नीच को लेकर वाद विवाद बने रहते हैं.

आप से इतना निवेदन है की आप न लड़ाई झगड़े करें और न ही करने दे| अमन चैन से जियें और जीने दे आजाद रहे और आजादी से सब को जीने दें| संविधान कानून का पालन करें और किसी अन्य को इसका उल्लंघन न करने दें आप से ही एक अच्छे भारत का निर्माण होना है “जय हिन्द जय भारत“

 

 

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सुषमा स्वराज ( 1952 - 2019 )

Uploaded Date: 08 August 2019

 

प्रारम्भिक जीवन

पूर्व विदेश मंत्री, प्रखर वक्ता सुषमा स्वराज जी का जन्म 14 फ़रवरी 1952 को हरियाणा राज्य के अम्बाला प्रान्त में हुआ था | उनके पिता का नाम हरदेव शर्मा व माता का नाम लक्ष्मी देवी था | उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कार्यकर्ता थे | वे मूलरूप से धरमपुरा लाहौर पकिस्तान के निवासी थे | उन्होंने अम्बाला में सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीती में स्नातक किया | उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्रा का सम्मान भी कॉलेज से प्राप्त हुआ | उन्होंने पंजाब विश्वविधालय से विधि की शिक्षा प्राप्त की | सुषमा स्वराज जी सर्वोच्च न्यायालय में 1973 में अधिवक्ता के पद पर कार्यरत हुई | उनका विवाह स्वराज कौसल जी के साथ हुआ |कौसल राज्य सभा के संसद और सर्वोच्च न्यायालय में सुषमा जी के साथ अधिवक्ता थे | स्वराज कौशल जी मिजोरम राज्य के राज्यपाल भी नियुक्त हुए थे | सुषमा जी की एक बेटी है जिनका नाम बासुरी है जो लन्दन में वकालत की पढाई कर रही है | सुषमा जी का अचानक स्वस्थ ख़राब होने और दिल का दौरा पड़ने की वजह से 67 वर्ष की आयु में 6 अगस्त 2019 को रात्रि 11.24 बजे दिल्ली में निधन हो गया |

आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है, लेकिन एक समय था जब महिलाओं को घर बाहर तक निकलने नहीं दिया जाता था। लेकिन कहते हैं बदलाव जरुर आता है। आज महिलाएं घर के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान दे रही है।

भारत की राजनीति में भी महिलाओं का उतना ही योगदान है जितना की पुरुषों का। जिन महिलाओं को घर को भी लड़ाई में नहीं भेजा जाता था। जिन्हें विदेश जाना तो दूर घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। वो देश संभाल रही है। और इसे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता कि आज हमारे देश की रक्षा मंत्री भी एक महिला थी और विदेश मंत्री भी महिला थी।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 1977 में ये देश की प्रथम केन्द्रीय मंत्रीमंडल सदस्या बनी वह भी 25 वर्ष की आयु में|

  • 1979 में 27 वर्ष की आयु में जनता पार्टी, हरियाणा की राज्य अध्यक्षा बनी|

  • स्वराज भारत की किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की प्रथम महिला प्रवक्ता बनी|

  • ये भाजपा की प्रथम महिला मुख्यमंत्री, केंन्द्रीय मंत्री, महासचिव, प्रवक्ता, विपक्ष की नेता व विदेश मन्त्री बनी |

  • ये भारतीय संसद की प्रथम एवं एक मात्र ऐसी महिला सदस्य है जिन्हें आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटीयन सम्मान मिला है|  

  • इन्होने चार राज्यों में 11 बार सीधे चुनाव लड़ी है|

 

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मेजर ध्यानचंद (राष्ट्रीय खेल दिवस) जन्म 29 अगस्त 1905 - मृत्यु 3 दिसम्बर 1979

Uploaded Date: 08 August 2019

 

मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था | वह भारतीय फील्ड हॉकी के एक महान खिलाडी थे | विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों में इनकी गिनती होती है| उनकी अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने तीन बार ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता | उनके जन्म दिवस को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है |

उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल किये | उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें भारत सरकार ने उन्हें 1956 में पदमश्री से सम्मानित किया | उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत भारतीय सेना में सेवा के साथ की | उन्हें 1927 में लांस नायक बनाया गया | 1937 में वह जब भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बनाये गए तभी उन्हें सेना में सूबेदार के पद पर नियुक्त कर दिया गया | 

मेजर साहब का खेल जीवन :

ध्यानचंद जी के खेल के पूरे विश्व में दीवाने है | जब वो खेलते थे तो मानो बॉल उनकी स्टिक से चिपक जाती थी | एक बार हॉलैंड के खिलाडियों ने उन पर आरोप लगाया की उनकी स्टिक में चुम्बक लगा है और इसी जाच होनी चाहिए इसी भ्रम में उनकी स्टिक को तोड़कर चेक किया गया और उनका ये आरोप गलत साबित हुआ | इसी तरह की घटना जापान में भी हुई थी | जहा उनकी स्टिक में गोंद लगा होने की बात कही गयी थी | ऐसे तमाम किस्से हे जो इस खिलाडी की महानता के बारे में बताते है |

मेजर साहब ने हॉकी खेलना सेना की ब्राह्मण रेजिमेंट के तत्कालीन मेजर बले तिवारी जी से सीखा | 1922 से 1926 तक वो सेना की ही प्रतियोगताओ में खेलते रहे | उन्होंने अपना पहला मैच 13 मई 1926 को अपना पहला मैच न्यूजीलैंड के विरूद्ध खेला | उन्होंने अपने अंतर्राष्ट्रीय कैरियर में 400 से अधिक गोल किये | 1949 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी से सन्यास ले लिया |

ओलिंपिक खेल में मेजर साहब का प्रदर्शन:

एम्सटर्डम ओलम्पिक खेलों 1928 में भारतीय हॉकी टीम ने फाइनल में हॉलैंड को 3 - 0 से हराकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया | फाइनल में ध्यानचंद जी ने दो गोल किये | एम्सटर्डम ओलम्पिक खेलों में भारतीय टीम ने अपने सभी मैच जीते |

 लास एंजिल्स में हुई ओलम्पिक प्रतियोगिताओं 1932 में मेजर ध्यानचंद जी सेंटर फॉरवर्ड के खिलाडी के तौर पर काफी सफलता प्राप्त कर चुके थे | इस प्रतियोगिता में दागे गए 262 गोल में से 101 गोल ध्यानचंद जी द्वारा किये गए | फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने अमेरिका को 24 - 1 से हरा दिया |

 बर्लिन ओलपिक खेलों में मेजर ध्यानचंद जी को भारतीय टीम का कप्तान चुना गया | भारतीय टीम को पहले ही अभ्यास मैच में जर्मनी से 4 - 0 से हार का सामना करना पड़ा जिससे सभी खिलाडियों को काफी दुःख पंहुचा | उसके बाद मेजर साहब ने टीम को एक जुट किया और पूरी प्रतियोगता में टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया |

 

 

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Article – 35 A और 370 पर भारत सरकार के प्रमुख निर्णय पर आज इससे सम्बन्धित कुछ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा

Uploaded Date: 05 August 2019

 

Article – 35 A और 370 पर भारत सरकार के प्रमुख निर्णय पर आज इससे सम्बन्धित कुछ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा

जम्मू कश्मीर पर कई दिनों के सस्पेंस के बाद आज भारत सरकार ने आर्टिकल 35 A और और 370 को खत्म कर दिया | इसके अलावा जम्मू – कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बाटने का प्रस्ताव रखा | जम्मू कश्मीर एक केंद्रशसित प्रदेश होगा जहा विधानसभा होगी और लद्दाख एक केंद्रशसित प्रदेश होगा जहा विधानसभा नहीं होगी |  

ARTICLE 35 - A

35ए को 1954 में इसे राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था। आर्टिकल 35ए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के 'स्थायी निवासी' की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को कुछ खास अधिकार दिए गए हैं। अस्थायी निवासी को उन अधिकारों से वंचित किया गया है। अस्थायी नागरिक जम्मू-कश्मीर में न स्थायी रूप से बस सकते हैं और न ही वहां संपत्ति खरीद सकते हैं। अस्थायी नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी और छात्रवृत्ति भी नहीं मिल सकती है। वे किसी तरह की सरकारी मदद के हकदार भी नहीं हो सकते। 

ARTICLE - 370

15 अगस्त 1947 तक गृहमंत्री लोह पुरुष बल्लभ भाई पटेल ने 449 भारतीय रियासतों को भारत में विलय कर लिया | 3 रियासतों जूनागढ़, हेदराबाद और जम्मू कश्मीर का विलय बाद में हुआ | जुनागढ़ को जनमत संग्रह के द्वारा, हेदराबाद को पुलिस करवाई (Operation पोलो) के द्वारा विलय किया गया | बाद में जम्मू-कश्मीर पर पकिस्तान ने आक्रमण कर दिया वहा के राजा हरि सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु से मदद मांगी | भारत सरकार ने रजा हरि सिंह की मदद की और पाकिस्तान को खदेड़ दिया | रजा हरि सिंह और प्रधानमंत्री के मध्य एक समझोता हुआ जिसमे जम्मू कश्मीर को भारत का अंग मान लिया गया | इस तरह 600 रियासतों में से 552 रियास्हतो का भारत में विलय हो गया | जम्मू कश्मीर को भारत में विलय के बाद शेख अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाली। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक संबंध को लेकर बातचीत की। इस बातचीत के नतीजे में बाद में संविधान के अंदर आर्टिकल 370 को जोड़ा गया। आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। आर्टिकल 370 के मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए। 

कश्मीर और कश्मीरियों को क्यों हे एतराज

आर्टिकल 35 A कश्मीर को एक विशेष अधिकार देता है कश्मीरियो को यह लगता है की आर्टिकल 35ए के हटने से वहा पर भारत के अन्य राज्यों के लोग वहा बसना शुरू कर देंगे और कश्मीरियो के अस्तित्वा पर खतरा मडराने लगेगा |

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Triple Talaq Bill 2019 (तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओ के लिए सशक्तिकरण या एक राजनीतिक कदम)

Uploaded Date: 31 July 2019

 

तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओ के लिए सशक्तिकरण या एक राजनीतिक कदम

मुस्लिम समाज में व्याप्त कुप्रथा तीन तलाक को ख़तम करने वाला मुस्लिम विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 राज्यसभा में पास हो गया |

पहले इस विधेयक के सफ़र की कुछ मुख्य बातो पर चर्चा करते है |

1. अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को असवेधानिक और कुरान के मूल सिधान्तो के खिलाफ बताया |

2. दिसम्बर 2017 में लोकसभा ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार बिल पास किया लेकिन राज्यसभा में बिल अटक गया |

3. 19 सितम्बर 2018 में मोदी सरकार तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए कानून लायी |

4. 12 जनवरी 2019 को दूसरी बार और 21 फ़रवरी को तीसरी बार अध्यादेश जारी किया गया |

तीन तलाक कानून पास होने के बाद के प्रभाव  

1. कानून को मुस्लिम महिला (महिला अधिकार संरक्षण कानून) बिल 2019 का नाम दिया गया है |

2. मौखिक, लिखित या किसी भी प्रकार से एक बार में पत्नी को तलाक देना जुर्म होगा |

3. पत्नी के मायके या ससुराल के करीबी रिश्तेदार ही इस बारे में केश दर्ज कर सकते है |

4. यह संगीन अपराध की श्रेणी में है इसलिए पुलिस बिना वारेंट के गिरफ्तार कर सकती है |

5. पति को 3 साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकते है, जमानत भी मजिस्ट्रेट कोर्ट से होगी|

6. लेकिन मजिस्ट्रेट बिना पीड़ित महिला का पक्ष्य सुने जमानत नहीं नदे सकते |

7. पीड़ित महिला के अनुरोध पर ही मजिस्ट्रेट समझोता करा सकते है |

सबसे पहले ट्रिपल तलाक के खिलाफ सहारनपुर के मोहला अली की बेटी अतिया साबरी ने प्रधान मंत्री मोदी से गुहार लगायी थी | उन्होंने अपने भाई रिजवान की मदद से तीन तलाक से लड़ने के लिए सुप्रीमकोर्ट से गुहार लगाई | राज्यसभा में बिल के पास होने पर उन्हें बेहद ही खुशी हुई | एसी बोहत सी मुस्लिम महिलाये इस कानून की मांग कर रही थी | अब वह आने वाली पीढ़ी को यह बता सकती हैं कि कितनी मेहनत व शिद्दत के बाद यह दिन सामने आया है। आज के बाद मुस्लिम महिलाओं के लिए नया सवेरा आएगा। उन्होंने मुस्लिम समाज की तीन तलाक पीडि़ताओं को संदेश दिया कि वे कभी डरकर न जिएं बल्कि उसका सामना करें।

लेकिन समाज का एक वर्ग जहा इसे सही कह रहा है वही एक वर्ग ऐसा भी है जो इसका विरोद कर रहा है |

मोलाना खालिद रसीद के अनुसार तीन तलाक बिल राजनीतिक है | इससे फायदा कम नुकशान ज्यादा है |

पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाब नबी आजाद के अनुसार सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओ को सुरक्षा देने के बजाये मुस्लिम परिवारों को बर्बाद करने की है | इसे अपराधिक क्यों बनाया गया ?

अब आने वाले समय में इस ऐतिहासिक फैसले के क्या परिणाम होंगे यह देखना होगा | समाज में यह क्या नया बदलाव लायेगा यह भी देखना होगा |

 

  

 

 

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Hima Das A Golden Girl

Uploaded Date: 25 July 2019

 

Hima Das A Golden Girl

हिमदास जिन्हें हम Dhing Express के नाम से भी जानते है |

एक भारतीय धावक है जो असम राज्य की रहने वाली है |

Dhing एक town का नाम है जो Nagaon district असम राज्य में पड़ता है |

 जिस कारण इन्हें “ढिंग एक्सप्रेस” के नाम से भी जाना जाता है |

इनके पिता का नाम रंजित दास और माँ का नाम जोनाली दास है |

 हिम दास का जन्म अत्यंत गरीब परिवार में 9 जनवरी 2000 को

असम राज्य के Nagaon District में हुआ था |

 इनके पिता indigenous Kaibarta community से belong करते थे |

दोनों ही परिवार को चलाने के लिए खेती पर निर्भर थे |

हिम दास ने अपनी शिक्षा Dhing Public High School से शुरू की |

 हिम दास शुरू में एक फुटबॉल player थी |

 जब वो जवाहर नवोदय विद्यालय में पद रही थी उसी समय उनके

अध्यापक शमशुल शेख की नजर उन पर पड़ी |

 फुटबॉल मैं उनकी गजब की फुर्ती देख वह दांग रह गये | Or उन्हें sprinting में जाने की सलाह दी|

Early Success

कम सुविधाओ और कठिन परिश्रम के बल पर हिम दास ने स्टेट लेवल के

अपने पहले ही मैच में 100 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक जीता |

जल्द ही हिम दास ने 200 मीटर इवेंट के लिए क्वालीफाई कर लिया |

जो बैंकाक में होने वाला था |

हिम दास महज 19 वर्ष की आयु मैं ही सबकी आँखों का तारा बन गयी है |

जिन्दगी एक खेल की तरह ही है जो खेल मैं लगातार लगा रहता है |

वो एक दिन सफल जरुर होता है | हिम दास के जीवन से हमें भी ये प्रेरणा मिलती है |

बोहोत गरीब परिवार की एक लड़की जो कच्चे फुटबॉल के

मैदान में बिनो जूतों के महनत करती थी आज दुनिया मैं देश 

 का नाम रोशन कर रही है | 

हिमा दास का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन-

  • 100 मीटर- (11.74 सेकेंड में),
  • 200 मीटर- (23.10 सेकेंड में),
  • 400 मीटर- (50.79 सेकेंड में) तथा
  • 4X400 मीटर रिले- (3:33.61 में)

2019 में हिमा ने पहला गोल्ड मेडल 2 जुलाई

को 'पोज़नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स' में 200 मीटर रेस में जीता था.

इस रेस को उन्होंने 23.65 सेकंड में पूरा कर गोल्ड जीता था।

7 जुलाई 2019 को पोलैंड में 'कुटनो एथलेटिक्स मीट' के

दौरान 200 मीटर रेस को हिमा ने 23.97 सेकंड

में पूरा करके दूसरा गोल्ड मेडल हासिल किया था।

13 जुलाई 2019 को हिमा ने चेक रिपब्लिक में हुई

'क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स' में महिलाओं की 200 मीटर

रेस को 23.43 सेकेंड में पूरा कर फिर से तीसरा गोल्ड मेडल हासिल किया था।

19 साल की हिमा ने बुधवार 17 जुलाई 2019 को

चेक रिपब्लिक में आयोजित 'ताबोर एथलेटिक्स मीट'

के दौरान महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.25 सेकेंड

में पूरा कर फिर से चौथा गोल्ड मेडल हासिल किया. इस दौरान

हिमा अपने रिकॉर्ड (23.10 सेकंड) के

बेहद करीब पहुंच गई थी लेकिन वो इसे तोड़ नहीं पाईं।

हिमा ने चेक गणराज्य में ही शनिवार 20 जुलाई 2019 में

400 मीटर की स्पर्धा दौड़ में 52.09 सेकेंड के

समय में जीत हासिल की. हिमा का जुलाई मास 2019 में

मात्र 19 दिनों के भीतर प्राप्त किया गया यह पांचवां स्वर्ण पदक है|

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दिल्ली पुलिस की परीक्षा में कैसे हो सफल

Uploaded Date: 23 July 2019

 

दिल्ली पुलिस की परीक्षा में कैसे हो सफल

दिल्ली पुलिस में अपना कैरिएर बनाने के बारे मैं जो युवा सोच रहे है उनके लिए बहद ही अच्छी खबर है दिल्ली पुलिस विभाग में जल्द ही खाली पड़े 8000 पदों को भरा जायेगा | आप अगस्त माह के प्रथम सप्ताह से आवेदन कर सकते है | लकिन इस बार दिल्ली पुलिस की लिखित परीक्षा मैं अहम बदलाव किये गए है उन्हें जानना बोहोत जरुरी है |

दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा का पैटर्न कुछ इस प्रकार है

Subject

No. Of Question

Maximum Mark

Reasoning

25

25

General Knowledge/ Current Affairs

50

50

Numerical Ability

15

15

Computer Fundamentals

10

10

TOTAL

100

 

100

 

इस बार की लिखित परिक्ष मैं जो अहम् बदलाव किया गया है वह है Reasoning के प्रश्नों की संखिया 35 से घटाकर 25 कर दी गयी है और Computer Fundamentals के 10 अतिरिक्त प्रश्नों को जोड़ा गया है | इसका मतलब साफ़ है की देश की राजधानी का जिम्मा जिन पर है उन्हें कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान होना जरुरी है | दिल्ली की बढती जनसंख्या और क्राइम के नए तरीको से निपटने और सभी कागजी करवाई को कम कर आधुनिक तरीके से अपराध से निपटने के लिए पुलिस को आधुनिक बनाना जरूरी है |

सबसे पहले बात करे मैथ्स और रीजनिंग की तो आपको पता है की मैथ्स और रीजनिंग का सिलेबस सभी परीक्षाओ का फिक्स रहता है अगर जरुरत है तो ज्यादा से ज्यादा revision करने की | सबसे पहले आप सभी chapter को बेसिक से अची तरह पढ़े जब आपका बेसिक clear हो जाये उसके बाद आप ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करे |

दिल्ली पुलिस परीक्षा शैक्षिक योग्यता (EDUCATIONAL QUALIFICATION FOR DELHI POLICE Exam )-

दिल्ली पुलिस परीक्षा में भाग लेने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से बारहवीं कक्षा (12th class) पास होना अनिवार्य है.

दिल्ली पुलिस परीक्षा उम्र सीमा (DELHI POLICE EXAM AGE LIMIT) –

दिल्ली पुलिस परीक्षा में भाग लेनें के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी अनिवार्य है.

दिल्ली पुलिस परीक्षा आयु सीमा में छूट (DELHI POLICE EXAM AGE RELAXATION) –  

अनुसूचित जाती / अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों के लिए (For SC/ST Candidates) –

दिल्ली पुलिस परीक्षा में अनुसूचित जाती व् अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट निर्धारित की गयी है.

अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए (For OBC Candidates) –

दिल्ली पुलिस परीक्षा में ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 3 वर्ष की छूट निर्धारित की गयी है.

दिल्ली पुलिस मेडिकल टेस्ट (DELHI POLICE MEDICAL TEST) –

1. जनरल/ओबीसी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  1. ऊंचाई (Height) – 170 सेंटीमीटर
  2. छाती (Chest) – 81 सेंटीमीटर और फुलाकर 4 सेंटीमीटर अधिक (85 सेंटीमीटर )

2. अनुसूचित जनजाति वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  • ऊंचाई (Height) – 165 सेंटीमीटर
  • छाती (Chest) – 76 सेंटीमीटर और फुलाकर 4 सेंटीमीटर अधिक (80 सेंटीमीटर )

3. अनुसूचित जाति वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  • ऊंचाई (Height) –  170 सेंटीमीटर
  • छाती (Chest) – 81 सेंटीमीटर और फुलाकर 4 सेंटीमीटर अधिक (85 सेंटीमीटर )

4. जनरल / ओबीसी वर्ग के लिए महिला उम्मीदवारों के लिए –

  • ऊंचाई (Height) –  157 सेंटीमीटर

5. अनुसूचित जाती व् अनुसूचित जनजाति वर्ग के महिला उम्मीदवारों के लिए –

  • ऊंचाई (Height) – 155 सेंटीमीटर

दिल्ली पुलिस शारीरिक दक्षता टेस्ट (Delhi Police Physical Efficiency Test)–

1. 31 वर्ष तक के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  • दौड़ (Race) – 6 मिनट में 1600 मीटर्स (1600 mtrs)
  • लंबी कूद (Long jump) – 14 फ़ीट
  • उच्ची कूद (High Jump) – 3’9”

2. 31 से 40 वर्ष तक के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  • दौड़ (Race) – 7 मिनट में 1600 मीटर् (1600 mtrs)
  • लंबी कूद (Long jump) – 13 फ़ीट
  • उच्ची कूद (High Jump) – 3’6”

3. 40 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष उम्मीदवारों के लिए –

  • दौड़ (Race) – 8 मिनट में 1600 मीटर् (1600 mtrs)
  • लंबी कूद (Long jump) – 12 फ़ीट
  • उच्ची कूद (High Jump) – 3’3”

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World Population Day

Uploaded Date: 11 July 2019

 

देश दुनिया की बढती जनसंख्या और उसके तत्कालीन एवं दूरगामी प्रभाव 

आज 11 जुलाई का दिन विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाना अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण और बढती जनसंख्या के कारण उत्पन्न होने वाली समस्यों की और पुरे विश्व का ध्यान अपनी और आकर्षित करता है | विश्व की तमाम सरकारों और निति निर्माताओ को ये ध्यान रखने की जरुरत है कि जनसंख्या और उससे जुड़े मसलो का हल उनकी विकास नीतियों के मूल में होना चाहिए | अगर भारत के सन्दर्भ में बात करे तो 1920 तक भारत में उच्च जनम डर और उच्च मृत्यु डर थी लेकिन उसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई | ऐसा सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक कारणों से संभव हुआ | बढती तकनीक, स्वस्थ सुविधाओ का बहतर होना, परिवार नियोजन के बारे में बढती शिक्षा और स्थिर राजनीतिक हालत भी जिम्मेदार है |

सेम्पल रजिस्ट्रेसन सिस्टम stastical report 2017 के अनुसार देश में जन्मदर 20.2 जबकि शहरो में 16.8 है| इसी तरह मृत्यु डर 6.3 जबकि शहरो में 5.3 है | अगर भारत को बढती जनसंखिया का लाभ लेना है तो उसे मानव पूंजी में अत्यधिक निवेश करना होगा | साल 2041 तक भारत में देश की कुल आबादी में 58.9% हिस्सा 21-59 आयु वर्ग के लोगो का होगा | इसका मतलब ये है की इस युवा भारत में अब हमें रोजगार के और आधिक अवसर पैदा करने होंगे | बहतर स्वस्थ सुविधाओ के साथ महिलाओ की भागीदारी को भी बढ़ाना होगा |

लेकिन भारत की बुजुर्ग होती आबादी भी एक बड़ी समस्या है | बुजुर्गो को जरुरत को पूरा करना उनको सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी एक बड़ी समस्या है अगर भारत में यही स्थिति बनी रही तो भारत जल्द ही चीन को पीछे छोड़ देगा |

बढती जनसंख्या का लाभ अगर लेना है तो देश को बुनियादी रूप से मजबूत होना होगा | प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर और पढाई छोड़ने वाले बच्चो की संखिया भी चिंता का विषय है | आंकड़ो की अगर बात करे तो मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ राज्यों में प्राथमिक स्कूलों की संखिया भले ही अधिक है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर काफी निचा है |

भारत की द्रुत गति से बढती जनसँख्या पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ देश कल और समाज सभी के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है अपितु देश के संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारा में भी बाधक है | आज जितने रोजगार के अवसर नहीं है उससे ज्यादा रोजगार लेने वालों की एक लम्बी कतार लगी हुई है | यह समस्या केवल रोजगार तक ही सिमित नहीं है अपितु देश की स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा या उपलब्ध अवसरों के लिए जरुरतमंद लोग भी लाभ नहीं ले पा रहे है | इसका मूल कारण है अवसरों का कम होना और अवसरों का लाभ लेने वालों की संख्या अधिक होना | हमें जनसँख्या नियंत्रण पर एक कठोर निर्णय लेना पड़ेगा ताकि देश के संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग हो सके और मिल रहे अवसरों का लाभ उठाया जा सके |  

अगर भारत देश को बढती जनसंख्या का लाभ लेना है तो उन सभी पहलुओ पर विचार करना होगा |         

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जीवन में सफल होने के तरीके |

Uploaded Date: 08 July 2019

 

सफलता और असफलता किसी भी मनुष्य की सोच पर निर्भर करती है | सफलता के मायने भी अलग- 2 लोगो के लिए अलग-2 है सफलता का मतलब किसी के लिए धन कमाना है किसी के लिए अच्छा घर या और कुछ भी हो सकता है जो उसे पसंद हो लेकिन life में सफल लोगो के जीवन को देखे तो उनोहोने कुछ ऐसे life style को अपनाया की आज वो दुनिया पर राज कर रहे है |

सफलता के कुछ खास तरीके है 

1. बड़ी सोच और कड़ी मेहनत

सबसे पहले हमें एक goal तय करना होगा आप हमेशा बड़ा करने की सोचो और उसके लिए हर तरह के त्याग और मेंहनत के लिए तेयार रहो जिन्दगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं है सब कुछ पाया जा सकता है |

2. Positive सोच रखो 

हमारे साथ जो भी होता है उसमे हमारा सोचने का तरीका बोहोत निर्भर करता | जीवन में हम जैसा सोचते है वैसा ही हमारे साथ होता है | अगर इन्सान चाहे तो वो सब कर सकता हे जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकता |

3. असफलता के डर को हमेसा के लिए मन से निकाल दो 

इस दुनिया में कोई भी ऐसा सफल व्यक्ति नही हे जिसने अपने जीवन में असफलता न देखि हो सफलता का रास्ता असफलता से ही होकर गुजरता है |

4. सफल व्यक्तियों के जीवन चरित्र को पढे और उनके अनुसार जीवन में बदलाव करे 

जब भी समय मिले ऐसे लोगो को पढ़े जिन्होंने समाज के या किसी जीवन के छेत्र में कुछ बड़ी उपलब्धि हासिल की हो आप अपने interest के आधार पर अपना रोल मोडल चुने |

उद्धरण के आधार पर अगर आपको किताबे पड़ने या लिखने का शौक है तो उसी आधार पर चरित्र का चयन करे |

5. समय का सही उपयोग करे 

समय बोहोत अनमोल हे एक बार समय गुजर जाता है तो फिर वापस नहीं आता सफल होने के लिए जीवन में dicipline और time management बोहोत अव्यस्यक हे |

6. नेगेटिव सोच और बुरी आदतों वाले माहोल से दूर रहे 

हमः ऐसे लोगो से दूर रहे जो नकारात्मक सोच और बुरी आदतों के सीकार हो मैं आपको पहले ही बता चूका हु हम जैसा सोचते है वैसा ही हमारे साथ होता है गलत भाव और गलत सोच आपको कभी भी सफल नहीं होने देगी |

7. सदेव अपने मन की सुने और माता पिता या अपने बड़ो की सलाह ले 

बोहोत बार हमारे जीवन में ऐसा समाये आता है जब हमें बोहोत ही important फैसले लेने होते है ऐसे समय मैं अपने माता पिता और बड़ो की सलाह ले और अगर फिर भी confusion हो तो आंखे बंद करके अपने परमेश्वर को पुकारे और जो मन फैसला करे उस पर आगे बढ़ जाये |

8. सफलता पाने वाले लोग कोई अलग काम नहीं करते वह हर काम अलग ढंग से करते है | पूर्वे राष्ट्रपति A.P.J अब्दुल कलम ने कहा था सपने वो नहीं होते जो हम सोते हुए देखते है सपने वो होते है जो हमें सोने ही न दे| 

9. जीवन में सफल होने के लिए हमें लगातार काम करते रहना चाहिए जब तक कोशिश कसरते रहो जब तक आप सफल न हो जाओ |

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महत्वपूर्ण तथ्य

Uploaded Date: 30 December 2018

 

महत्वपूर्ण तथ्य-2011
    भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बना।    -1 जनवरी
    विश्व बैंक ने चीनी मुद्रा युआन में अपना पहला ब्रांड जारी किया।    -5 जनवरी
    भारत में निर्मित विश्व के सबसे हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।     -10 जनवरी
    गोल्फर गगनजीत भुल्लर यूरोपीयन चैलेंज टूर जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।    -16 जनवरी
    देश भर में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटि (एमएनपी) सेवा लागू हुई।    -20 जनवरी
    बांग्लादेश ने अपने अर्धसैनिक बल बांग्लादेश रायफल्स का नाम बदलकर बॉर्डर गार्ड ऑफ बांग्लादेश (बीजीबी) किया।    -23 जनवरी
    शास्त्रीय गायक और भारत रत्न से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी का निधन हुआ।    -24 जनवरी
    राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह ने पाटिल राष्ट्रीय मतदाता दिवस का शुभारंभ किया।    
     -25 जनवरी
    भारत ने ईरान को कच्चे तेल का भुगतान यूरो में करने का फैसला किया    -3 फरवरी
    केरल हाईकोर्ट ने राज्य में देश का पहला इस्लामिक बैंक खोलने की मंजूरी दी।    
     -3 फरवरी
    दिपिका पल्लिकल विश्व रैंकिंग में 24वें स्थान में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला स्क्वॉश खिलाड़ी बनीं।    -4 फरवरी
    केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सेल के झारंखंड स्थित चिरिया खदान में लौह अयस्क के खनन की सशर्त मंजूरी दी।    -9 फरवरी
    चीन ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल किया।    -14 फरवरी
    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने असोम के शिवसागर में दूसरे राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (आरजीआइपीटी) की आधारशिला रखी।    -19 फरवरी
    रेलवे ने कोयला और लौह अयस्क खदानों को रेल से जोड़ने के लिए आरटूसीआई नाम से नई नीति की घोषणा की।     -23 फरवरी
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदिरुप्पा कृषि बजट पेश करने देश के पहले मुख्यमंत्री बने।    -24 फरवरी
    भारतीय सेना की मेजर मिताली मधुमिता वीरता पुरस्कार पाने वाली पहली महिला अधिकारी बनी।    -25 फरवरी
    83वें ऑस्कर अवार्ड्स में ‘द किंग्स स्पीच’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, कोलिन फर्थ को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और नताली पोर्टमैन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया।    
     -28 फरवरी
    लोकसभा ने स्टेट बैंक ऑफ इंदौर के भारतीय स्टेट बैंक में विलय के विधेयक को मंजूरी दी।    -1 मार्च
    संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से लीबिया को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हटाने का निर्णय किया।    -2 मार्च
    उच्चतम न्यायालय ने असाधारण मामलों मंे रोगी को ‘परोक्ष इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनिशिया)’ दिए जाने का सही ठहराया।    -7 मार्च
    उरूग्वे ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।    -16 मार्च
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ब्रिटेन, फ्रांस और लेबनान द्वारा रखे गए लीबिया के ऊपर ‘उड़ान निषिद्ध क्षेत्र’ के प्रस्ताव को मंजूरी दी।    -17 मार्च
    फ्रांस लीबिया में सैन्य कारवाई के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप करने वाला पहला देश बना।    -19 मार्च
    प्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोंसले को संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ कामन्स’ में सम्मानित किया गया।    -22 मार्च
    भारत ने फाइनल मंे श्रीलंका को 6 विकेट से हराकर क्रिकेट विश्व कप-2011 का खिताब जीता।     -2 अप्रैल
    सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने जन लोकपाल विधेयक लागू कराने के लिए आमरण अनशन शुरू किया।    -5 अप्रैल
    मुंबई की अंकिता जोशी शून्य गुरूत्वाकर्षण मंे पेंटिंग बनाने वाली विश्व की पहली महिला बनी।    -9 अप्रैल
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्वदेश निर्मित ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी16 का सफल प्रक्षेपण कियज्ञं    -20 अप्रैल
    थाइलैंड की रॉयल ‘येलो शर्ट’ पार्टी से जुड़े राजनीतिक समूह ने जुलाई मंे होने वाले चुनावों में भाग नहीं लेने का फैसला किया।    -25 अप्रैल
    वर्ष 2010 का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार वरिष्ठ फिल्मकार के. बालाचंदर को देने की घोषण की गई।    -29 अप्रैल
    के. वी. कामथ को देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।    -30 अप्रैल
    फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बना।    -1 मई
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश का सबसे तेज सुपर कंम्प्यूटर ‘सागा-220’ बनाया।    -2 मई
    जरबोम गामलिन को अरूणाचल प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाया गया।    -5 मई
    अमेरिकी उपन्यासकार फिलिप रॉथ को मैन बुकर पुरस्कार-2011 के लिए चुना गया।    -19 मई
    रेल मंत्रालय ने अगरतला से बांग्लादेश के अखौरा को जोड़ने के लिए 14 किमी. लंबी रेल पटरी बिछाने के लिए 251 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी।    -22 मई
    फ्लाइट लेफ्टिनेंट निवेदिता चौधरी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिलाकर्मी बनीं।    -23 मई
    बंगाल ने गुवाहाटी में मणिपुर को 2-1 से हराकर संतोष ट्रॉफी राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप का खिताब जीता।    -30 मई
    भारतीय डाक विभाग ने देश भर में मोबाइल फोन के जरिए डाकघरों से धन स्थानांतरण सेवा शुरू की।    -1 जून
    संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2,083 करोड़ रुपए लागत की डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना की आधारशिला रखी।    -3 जून
    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनपी) ने पहली बार भारत को विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम की मेजबानी सौंपी।    -4 जून
    भारत के नवीनतम युद्धपोत ‘आईएनएस काबरा’ को नौसेना में शामिल किया गया।    
     -8 जून
    दक्षिण कोरिया की बान की मून को दोबारा संयुक्त राष्ट्र का महासचिव चुना गया।     -22 जून
    चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी।    
     -24 जून
    चीन की यिहान वैंग गत चैंपियन भारत की साइना नेहवाल को हराकर इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरिज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीता।    -26 जून
    फ्रांस की वित्तमंत्री क्रिस्टन लेगार्ड को आईएमएफ का प्रमुख चुना गया।    -28 जून
    अमेरिका ने छः साल के बाद भारत को मानव तस्करी की ‘निगरानी सूची’ से निकाला    -28 जून
    आजादी के बाद पहली सामाजिक-आर्थिक और जाति आधारित जनगणना 2011 का पश्चिमी त्रिपुरा जिले में हेजमारा खंड के संखोला गांव में शुरू हुई     - 29 जून
    गुडगांव में देश के पहले अक्षय ऊर्जा आधारित स्मार्ट मिनी ग्रिड सिस्टम का शुभारंभ किया गया     -1 जुलाई
    जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली।    -2 जुलाई
    चेक गणराज्य की पेत्रा क्वितोवा ने रूस की मारिया शारापोवा का हराकर विंबल्डन-2011 का महिला एकल खिताब जीता।    -2 जुलाई
    नोवाक जोकोविक ने राफेल नडाल को हराकर विंबल्डन-2011 का खिताब जीता।      -3 जुलाई।
    2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सीबीआई की आरे से आरोप लगाए जाने के बाद कपड़ा मंत्री दायानिधि मारन ने केन्द्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दिया।    -7 जुलाई
    दक्षिणी सूडान दुनिया का सबसे नया (193वां) देश बना।    -9 जुलाई
    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में बदलाव करते हुए दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया।    -12 जुलाई
    इसरो ने अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-12 का श्रीहरिकोटा से स्वदेशी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी, सी17 से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष मंे प्रक्षेपण किया।    -15 जुलाई
    उच्चतम न्यायालय ने केरल के श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर से खजाना निकालने और उसके संरक्षण पर निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक सी. वी. आनंद बोस की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की।    -21 जुलाई
    प्रसिद्ध निशानेबाज गगन नारंग को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया।    -22 जुलाई
    भारत को अंतर्राष्ट्रीय रबड़ अध्ययन समूह (आईआरएसजी) का नया अध्यक्ष चुना गया।    -23 जुलाई
    भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।    -25 जुलाई
    भारत की नीलिमा मिश्रा और हरीश हांडे को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार के लिए चुना गया।    -27 जुलाई
    महान फुटबॉलर पेले ने ब्राजील के राष्ट्रपति डिलिमा रोसेफ से 2014 विश्व कप के लिए मानद एंबेस्उर बनने का आमंत्रण स्वीकार किया।    -27 जुलाई
    भारत एक महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र परिषद का अध्यक्ष बना।    -1 अगस्त
    यिंगलुक शिनवात्रा थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी।    -5 अगस्त
    लोबासंाग सांगेय ने तिब्बत की निर्वासित सरकार के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।    - 8 अगस्त
    ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में 28 साल बाद कांस्य पदक जीत इतिहास रचा।    -14 अगस्त
    स्वदेशी तकनीक से आईएनएस सतपुड़ा को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।    -16 अगस्त
    पूर्व भारतीय कप्तान और स्टार स्ट्राइकर बाई चुंग भूटिया ने अपने 16 साल के शानदार अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल कैरियर को अलविदा कहाँ    -24 अगस्त
    सिंगापुर में 18 साल में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए मतदान शुरू हुआ    -27 अगस्त
    माओवादी नेता डॉ. बाबूराम भट्टाराई को नेापाल का नया प्रधानमंत्री चुना गया।    
     -28 अगस्त
    प्रख्यात उर्दू शायर अखलाक मोहमद खान शहरयार को 44वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।    -19 सितम्बर
    वर्ष 2009 के लिए 45वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिन्दी लेखक अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल को संयुक्त रूप से जबकि वर्ष 2010 के लिए 46वां ज्ञानपीठ पुरस्कार कन्नड़ लेखक चंद्रशेखर कंबर को चुना गया।    -20 सितंबर
    भारत ने ओडि़शा के चांदीपुर तट से परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम और 350 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली ‘पृथ्वी-2’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया।    -26 सितंबर
    केरल शत-प्रतिशत बैंकिंग वाला देश का पहला राज्य बना।    -1 अक्टूबर
    प्रसिद्ध कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी एप्पल के संस्थापक व पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स का निधन हुआ।    -5 अक्टूबर
    भारत ने दुनिया का सबसे सस्ता टेबलैट पीसी ‘आकाश’ लांच किया।    -5 अक्टूबर
    भारत को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (इकोसाक) के लिए चुना गया।    -25 अक्टूबर
    जापानी सुपर कंप्यूटर ‘के कंप्यूटर’ ने प्रति सेकंड 10 क्वाड्रिलियन गणना कर दुनिया की सबसे तेज मशीन के रूप में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा।    -4 नवम्बर
    जाने-माने गायक व संगीतकार भूपेन हजारिका का निधन हुआ।    -5 नवम्बर
    ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने ‘करप्शन परसेप्शन इंडेक्स’ में भारत को 95वां स्थान दिया।    -1 दिसम्बर
    स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने और शहरों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चीन के सान्या शहर में ब्रिक्स देशों की बैठक आयोजित हुई।    -2 दिसम्बर
    राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल टी-90 मुख्य युद्धक टैंक की सवारी करने वाली पहली राष्ट्र प्रमुख बनी।    -5 दिसंबर
    लोकपाल की पीठ और सर्व कमेटी में 50 प्रतिशत आरक्षण के संबंध मंे ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को हटाया गया।    -22 दिसंबर

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U.P POLICE में 49568 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

Uploaded Date: 18 November 2018

 

योगी सरकार ने प्रदेश के युवाओं दशहरे के शुभ अवसर पर किये गये वादे को पूरा करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के रिक्त 49568 पदों की भर्ती प्रक्रिया को शुरू कर दिया है | Online आवेदन की प्रक्रिया 19/11/2018 से शुरू होगी और Online आवेदन की अंतिम तिथि आवेदन की अंतिम तिथि 18/12/18 तय की गई है | 

रिक्तियों का पूरा विवरण इस प्रकार है-

                           Important Dates                                                                                      

                                Application Fee

® Press Release Issued : 19/10/2018

® General / OBC : 400/-

® Notification Released : 16/11/2018

® SC / ST : 400/-

® Application Begin : 19/11/2018

® Pay the exam fee through online fee mode

® Last Date for Apply Online : 08/12/2018

 

® Last Date Offline Fee Payment : 10/12/2018

 

® Exam Date : 04-05 January 2019 (Tentative)

 

® Admit Card Available : December

 

 

Vacancy Details Total : 49568

Post Name

Total

Age Limit

Eligibility

Constable Civil Police

31360

Male 18-22

Passed 10 + 2 Exam in any

 

 

Female 18-25

Recognized Board in India

 

Constable Civil Police Category Wise Vacancy Details

General

SC

ST

OBC

TOTAL

15681

6585

627

8467

31360

 

Constable Reserve Territorial Armed Category Wise Vacancy Details

General

SC

ST

OBC

TOTAL

9104

3824

364

4916

18208

 

Physical Eligibility

Category

        Male

Gen/OBC/SC

Male ST

Female Gen/OBC/SC

Female ST

Height

168 cms

160 cms

152 cms

147 min

Chest

77-84 cms

77-82 cms

NA

NA

Running

4.8 Km in 25 min

    4.8 Km in 25 min

2.4 Km in 14 min

2.4 Km in 14 min

EXAM PATTERN

प्रश्न पत्र स्वरुप

प्रश्न पत्र में बहु विकल्पीय प्रश्न अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में होंगे

 

 

पाठ्यक्रम

 

 

प्रश्नों की संख्या

सामान्य ज्ञान

38

संख्यात्मक और मानसिक छमता

38

मानसिक अभिरुचि, तार्किक छमता

37

सामान्य हिन्दी

37

प्रश्नों की कुल संख्या

150

कुल अंक

प्रत्येक प्रश्न के लिये 2 अंक है, कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न के लिये 300 अंक है!

ऋणात्मक अंक

प्रत्येक गलत उत्तर के लिये 0.5 अंक काटा जायेगा!

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SSC GD 2018 NOTIFICATION

Uploaded Date: 18 November 2018

 

SSC GD 2018 NOTIFICATIO

Students it’s a great news for job finders SSC has released official notification for the SSC CONSTABLE recruitment 2018. To apply SSC-GD 2018 online application form every candidate must pay a fee of Rs100 through online or through Chapman of SBI. This exam is conduct in four phases

First phase All the aspirant have to attend physical standard test (PST).

Second phase The second phase is physical efficiency test(PET).

Third phase In third phase students have written exam.
Fourth phase Fourth and the last phase is medical exam one by one as selection process .
HIGHLIGHT OF SSC-GD JOB

ORGANIZER NAME-STAFFSELECTIONCOMMISSION

TOTAL NO OF VACANCIES- 54953(approx)

VACANCIES NAME- CONSTABLE (GENERAL DUTY)

CRPF(Central Reserve Police Force)-21566 vacancies

CISF(Central Industrial Security Force)-200 vacancies

BSF(Border Security Force)-16984 vacancies

SSB( Sashastraseemabal)-8546 vacancies

ITBP(Indo Tibetan Border Police)-4126

NIA(National Investigation Agency)-08

AR(Assam Rifles)-3076 vacancies

PAY SCALE-Rs 21700--to-Rs69100

JOB CATEGORY-Central government job

JOB PLACEMENT-Anywhere in india.

APPLICATION MODE-Online mode only

OFFICIAL WEBSITE- www.ssc.nic.in,  www.ssconline.nic.in

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How to Achieve Best Rank in Competetitive Exams

Uploaded Date: 03 August 2018

 

The most students do not able to decide what to do do after 12th. There are many oppourtunities for the students to make thier carrier. For government jobs students have to take parts in competitive exams. Competitive exams are not only hardwork but also these are very costly in education. Now a days, competetive exams have been very tough and there are so many deficulties to achieve a good or satisfactory rank. SSC is a good platform to get government job.

    Staff Selection Commission - Combined Graduate Level Examination, often referred to as SSC CGL is an examination conducted to recruit staff to various posts in ministries, departments and organisations of the Government of India. There are also other exams like banking, railway, Delhi Police etc. by that job can be taken very easily if the competeter has determine. First of all to prepare any competetive exam, you have to understand the prerequisites of examination.

   You also have to know or understand the weightage of the subject that have to prepare. Candidate must have to scan through previous year exam paper that help him to understand the syllabus that also help him to get good rank.

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